अयोध्या में मस्जिद के लिए कोई स्थान नहीं

0
151

पुष्कर,(निसं) : अयोध्या में गर्भगृह पर जल्द ही सिर्फ राम मंदिर बनना चाहिए। मस्जिद के लिए वहां कोई स्थान नहीं है। संत समाज इस मामले में संयम रखे हुए हैं, लेकिन संयम की ज्यादा परीक्षा नहीं होनी चाहिए। भाजपा का आपाद मस्तक वस्त्र एवं शरीर राम भक्तों के खून से लथपथ है। अगर भाजपा कहती है कि राम जन्मभूमि पर मस्जिद भी जरूर बने तो यह राष्ट्र को धोखा है। यह बात शनिवार को पुरी स्थित गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने पुष्कर के ब्रह्म चौक में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही। शंकराचार्य ने कहा कि आडवाणी ने राम के नाम पर रथ यात्रा निकाली थी। जब भाजपा के दो सांसद थे। ‘

रामजी के नाम पर केंद्र में बहुमत की सरकार आई है। उन्होंने कहा कि सैनिकों पर कायराना हमले हो रहे हैं। उनके अनुसार धर्म युद्ध में खुद योद्धा अपनी सेना का नेतृत्व करते हैं। जबकि छद्म युद्ध में हमारे जवान शहीद हो रहे हैं और राजनेता अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रवादी सैनिकों को मारने का प्रयास करने वाले, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों को भारत छोड़ देना चाहिए।

उनको आतंकवादी घोषित कर भून दिया जाना चाहिए, लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है कि राजनेता एसी में बैठकर वार्तालाप करके  समझौता कर देश के सैनिकों के बलिदान पर पानी फेर देते हैं। राजनेता देश के लाल सैनिकों को गाजर-मूली की तरह कटने के लिए झोख देते है  । जब दलाई लामा अतिथि के रूप में बुलाया गया, उसी समय चीन ने अपनी गुप्तचारों से आतंकवादियों से अराजक तत्वों से भारत की सीमा और भारत को भर दिया। हमारे सैनिकों पर इतना अत्याचार हो रहा है, फिर भी केन्द्र सरकार इतना क्यों सह रही है? शंकराचार्य ने गौ हत्या को राष्ट्रदोह घोषित करने का आह्वान किया।

धर्मनिरपेक्ष शब्द घातक

धर्म के राजनीति में प्रवेश पर शंकराचार्य ने कहा कि बिना धर्म के राजनीति एक विधवा या विधुर की तरह होती है। शंकराचार्य ने धर्मनिरपेक्ष शब्द को भी देश के लिए घातक बताया। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से राजस्थान धरोहर संरक्षण प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकर सिंह लखावत व संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत ने माला और शॉल ओढ़ाकर शंकराचार्य का स्वागत किया। पालिकाध्यक्ष कमल पाठक ने मुख्यमंत्री की तरफ से माला भेंट की। साथ ही पुष्कर तीर्थ की तस्वीर भेंट की। इस मौके पर विभिन्न अखाड़ों से जुड़े  साधु-संत और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

LEAVE A REPLY