फडऩवीस और पंकजा की लड़ाई सड़क पर

0
9695

मुंबई, : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस की सरकार बनने के बाद भाजपा में काम कम और विरोधियों को निपटाने की सियासत बढ़ती ही जा रही है। मुख्यमंत्री फडऩवीस के विरोधी रहे एकनाथ खड़से को पद से हटाये जाने के बाद अब महिला बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे मुख्यमंत्री गुट के निशाने पर हैं मगर पंकजा मुंडे हार मानने की बजाय संघर्ष का रास्ता चुना है जिससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस सकते में हैं।
भाजपा के अंदर चल रही अंदरूनी सियासत उस समय उभरकर सामने आयी जब भगवानगढ़ में पंकजा मुंडे ने अपने विरोधियों को जमकर लताड़ लगाई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस भले ही पार्टी और सरकार में सब कुछ ठीकठाक बता रहे हों लेकिन पंकजा मुंडे ने सीधे तौर पर सब कुछ ठीक नहीं है, यह बता दिया है। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे एकनाथ खड़से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस की राह में कांटे की तरह थे। पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहनेे के लिए एकनाथ खड़से को निपटाने की मुहिम मुख्यमंत्री गुट ने छेड़ी और कामयाब भी हुए। राज्य में दो साल से बनी सरकार के कामों की समीक्षा की जाये तो काम कम और विरोधियों को निपटाने में अधिक समय दिया जा रहा है। यही कारण है कि महाराष्ट्र की जनता अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर रही है लेकिन देवेंद्र फडऩवीस सब कुछ ठीकठाक बता रहे हैं। एकनाथ खड़से को मंत्री पद से हटाए जाने के पहले पंकजा मुंडे को चिक्की घोटाले में घसीटा गया जबकि मंत्री महोदय का यह रुटीन वर्क है।
इसी बदनामी को आधार बनाकर मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल में विस्तार में पंकजा का कद छोटा कर दिया। महाराष्ट्र में जब भाजपा सरकार का गठन हो रहा था उस समय देवेंद्र फडऩवीस, एकनाथ खड़से तथा पंकजा मुंडे का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में था। देवेंद्र फडऩवीस मुख्यमंत्री बन गये लेकिन खड़से और पंकजा मुंडे की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी फडऩवीस को खटकती रही। खड़से को दाऊद मामले में निपटाने के बाद पंकजा मुंडे को निपटाने के लिए मुख्यमंत्री गुट ने कई तरह के हथकंडे अजमाने शुरू कर दिये  लेकिन स्व. गोपीनाथ मुंडे ने पंकजा को हार मानने की बजाय संघर्ष करने का रास्ता दिखाया था इसलिए वह भगवानगढ़ की रैली में खुद को चक्रव्यूह में फंसा अभिमन्यु बता बैठी। पंकजा ने कहा कि मैं अपना त्यागपत्र साथ लेकर चलती हूं। मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। यदि ऐसा कभी किया तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगी। उन्होंने भगवानगढ़ में कौरव-पांडव के युद्घ का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कभी पाप हावी होता है तब किसी न किसी को हथियार लेकर खड़ा होना पड़ता है। मुझे अभिमन्यु की तरह घेरा जा रहा है, उसे मैं तोड़कर रहंूगी। पंकजा मुंडे का यह बयान साफ साबित करता है कि महाराष्ट्र भाजपा और सरकार में सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। पंकजा की भगवानगढ़ की रैली में लाखों का जनसमुदाय देखकर मुख्यमंत्री गुट भौंचक्कारह गया है क्योंकि इस रैली ने यह साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडऩवीस से ज्यादा लोकप्रिय नेता पंकजा मुंडे हैं।

LEAVE A REPLY