गायत्री प्रजापति पर कानून का शिकंजा

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पंजाब केसरी/नई दिल्ली/ लखनऊ: उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गायत्री प्रजापति के खिलाफ अब गैंगरेप का केस दर्ज होगा। उत्तर प्रदेश में जारी विधानसभा चुनावों के दौर के बीच सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, गायत्री प्रजापति पर एक महिला के साथ लंबे समय तक यौन शोषण करने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने गायत्री प्रजापति के खिलाफ गैंगरेप, छेड़छाड़ और महिलाओं के शोषण का एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया है कि प्रजापति पर गैंगरेप छेड़छाड़ का आरोप है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दो महीने के भीतर स्टेट्स रिपोर्ट दें। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर यूपी सरकार से आठ हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। प्रजापति इस समय अखिलेश कैबिनेट में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर हैं। 35 वर्षीय पीडि़त महिला प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने पर सुप्रीम कोर्ट गई थी।

उसका कहना था कि उसके साथ गैंगरेप हुआ और उसकी बेटी का भी यौन उत्पीडऩ किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, पीडि़त महिला ने शिकायत में कहा था कि वह प्रजापति से करीब तीन साल पहले मिली थी। महिला का आरोप है कि मंत्री ने उसकी चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोशी की हालत में उसके साथ रेप किया था। महिला ने घटना की तस्वीरें लेने का भी आरोप लगाया। महिला का यह भी आरोप है कि प्रजापति और उसके साथियों ने कई बार उसका गैंगरेप किया। गायत्री प्रजापति पर आय से अधिक संपत्ति रखने, अवैध कब्जे, अवैध खनन सहित कई संगीन आरोप लग चुके हैं। कुछ महीने पहले उन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। हालांकि मुलायम के दबाव में अखिलेश को दोबारा उन्हें सरकार में शामिल करना पड़ा।

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