मेनका गांधी का पेंथर को गोली नहीं मारने के निर्देश

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अलवर, (वार्ता) : केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने वन विभाग के अधिकारियों को आदमखोर पैंथर को गोली मारने की बजाए उसकी पहचान करने के निर्देश है। सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक आरएस शेखावत ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री मेनका गाँधी का फोन आया था। उन्होंने कहा कि फ़िलहाल आदमखोर पैंथर की पहचान के सबूत नहीं है और गोली मारने से किसी निर्दोष पेंथर की जान जा सकती है। इसलिए क्षेत्र में कुछ दिनों तक जितने भी पैंथरों का मूवमेंट होगा उन्हें ट्रेंकुलाइज करने और पिंजरे में पड़कने के प्रयास किये जायेगे।

उन्होंने कहा कि पकडे गए पैंथरों का डीएनए टेस्ट कराकर उसका मिलान किया जाए और आदमखोर पेंथर को चिन्हित किया जायेगा। श्री शेखावत ने बताया कि इसके लिए फ़िलहाल सरिस्का के जैतपुर और सिलीबावड़ी क्षेत्र में पांच ङ्क्षपजरे और 20 कैमरे ट्रेप और दो डॉंक्टरो की ट्रंकुलाइज टीम मौजूद है। इसके आलावा क्षेत्र में दिन रात पुलिस और फारेस्ट की 6 सर्च टीम भी मौके पर पेंथर को ढूंढने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि सरिस्का प्रसासन ने गाँवो के लोगो को शाम साढे चार बजे के बाद और सुबह सात बजे से पहले घरो से बहार खेतो और जंगल में नही जाने की अपील की है। जिससे आदमखोर पेंथर के हमले से बचा जा सके।

अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभ्यारण्य क्षेत्र में आदमखोर पेंथर को आज चौथे दिन भी सरिस्का प्रसासन और पुलिस की टीम नही ढूढ पाई है। दो दिन पूर्व वन विभाग के उच्च अधिकारियो द्वारा आदमखोर पेंथर को गोली मारने के आदेश पर अघोषित रोक लगा दी गई है और आदमखोर पेंथर को ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में कैद करने का प्रयास किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को जब मिडिया के जरिये पता चला कि सरिस्का में आदमखोर पेंथर को गोली मारने के आदेश जारी किये गए है तो उन्होंने स्थिति के बारे में फारेस्ट और प्रसासन के अधिकारियो से बात की। उन्होंने कहा कि इस कार्यवाही में किसी निर्दोष पेंथर की जान जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। इसलिए पहले इस क्षेत्र में जितने भी पेंथर की टेरेटरी है उनको पिजरे में कैद किया जाये। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में एक से लेकर पांच पेंथर का मूवमेंट हो सकता है जिन्हें पकड़ कर पहले उनका डीएनए टेस्ट लिया जाये और 12 फरवरी को मृतक महिला शांतिदेवी और रामकुवार मीणा के शिकार के बाद लिए डीएनए सैम्पल से मिलान किया जायेगा।

इसके बाद उस पेंथर को हमेशा के लिए पिजरे में रखा जाए और शेष पकडे गए पेंथर को कुछ समय बाद वापिस छोडऩे का फैसला विशेषज्ञों की राय के अनुसार लिया जाएगा। सरिस्का क्षेत्र में आठ दिन में चार लोंगो की जान ले चुके बघेरे को पकड़ने के लिए केवलादेव पक्षी उद्यान की टीम भी सरिस्का पहुंच गई है। टीम में घना के निदेशक बीजू जॉय के अलावा गश्ती दल के रेंजर मनोज यादव एवं आठ कर्मचारी शामिल हैं। निदेशक बीजू जॉय को बघेरों के मामले में अच्छी जानकारी है। उन्हें ट्रंकुलाइज का भी एक्सपर्ट माना जाता है। वहीं रेंजर मनोज यादव काफी समय तक सरिस्का में रहे हैं। वे सरिस्का जंगल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। इसलिए वन विभाग ने इन्हें खासतौर से सरिस्का भेजा है। सिलीबावड़ी गांव में वन विभाग ने अस्थाई कंट्रोल रूम शुरू किया है। इसके लिए दो मोबाइल नंबर जारी किये हैं।

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