मैत्रेय परियोजना पर पुनर्विचार की आवश्यकता : योगी

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मैत्रेय परियोजना पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के कारण इससे प्रभावित किसान इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं और किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की राय अवश्य ली जानी चाहिए।

संस्कृति एवं लोक सेवा प्रबन्धन विभाग का प्रस्तुतिकरण के दौरान कुशीनगर जिले में चलायी जा रही मैत्रेय परियोजना का जिक्र आने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना पर पुनर्विचार की आवश्यकता है, क्योंकि अनावश्यक भूमि अधिग्रहण के कारण इससे प्रभावित किसान इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

इस परियोजना की संकल्पना एवं इसको लागू करने का तरीका ठीक न होने के कारण यह अभी तक मूर्त रूप नहीं ले पायी है। किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की राय अवश्य ली जानी चाहिए। जहां तक सम्भव हो जिलों में मौजूद ऊसर, बंजर जैसी अनुपजाऊ भूमि का उपयोग परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना की व्यापक समीक्षा करते हुए इस पर पुनर्विचार किया जाए और इसे रोक दिया जाए, क्योंकि इस परियोजना में शामिल ट्रस्ट ने 14 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी आज तक इसे आगे बढ़ाने की दिशा में कोई कार्य नहीं किया। भातखण्डे संगीत संस्थान पर चर्चा करते हुए श्री योगी ने कहा कि इसकी शाखाएं प्रदेश के अन्य जिलों में भी स्थापित करने की सम्भावनाओं को तलाशा जाए, क्योंकि संगीत में बालिकाओं की रुचि होती है।

ऐसे में उन्हें एक अच्छे संगीत संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कॉलेजों को इस संस्थान से सम्बद्ध करने पर भी विचार करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने विपन्न और वृद्ध कलाकारों को दी जाने वाली मासिक पेंशन की राशि को बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित ऐसी ही योजनाओं से प्रदेश सरकार द्वारा संचालित इस योजना को जोडऩे के लिए कहा।

उन्होंने ब्रज क्षेत्र में कला केन्द्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी विचार करने का आश्वासन दिया। श्री योगी ने कहा कि लोक परम्परा, लोक संस्कृति, लोकगीत तथा ऐतिहासिक परम्पराओं पर केन्द्रित लाइट एण्ड साउण्ड कार्यक्रमों के आयोजन पर भी काम किया जाए। उन्होंने अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम को ‘सुप्रभातम’ नाम से आयोजित करने का भी आश्वासन दिया।

श्री योगी ने कहा कि हमारी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए हम सभी को प्रयास करने होंगे। सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना होगा, ताकि हमारी आने वाली पीढिय़ां अपने गौरवशाली अतीत को देख सकें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से सांस्कृतिक गतिविधियों को बहुत बढ़ावा दिया जा सकता है। प्रदेश सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम उठाते हुए प्रदेश की संस्कृति को हर हाल में संरक्षण प्रदान करते हुए बढ़ावा देगी।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने लोक सेवा प्रबन्धन विभाग का भी प्रस्तुतिकरण देखा। उन्होंने लोक सेवा प्रबन्धन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जिन विभागों की सेवाओं के सम्बन्ध में जनता को सूचना दे रहे हैं, उनके द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्रों जैसे जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, किसान बही, भूमि का अविवादित नामांतरण प्रमाण-पत्र को जारी करने में लगने वाले समय को कम करने के लिए कहें। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण-पत्र को जारी करने में 20 दिन का समय लगाना अधिक है।

उन्होंने कहा कि इसे कम समय के अन्दर आवेदक को उपलब्ध कराया जाए। दोनों विभागों के प्रस्तुतिकरण के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा सहित मंत्रिमण्डल के अन्य सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

–  (वार्ता)

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