कश्मीर में इंटरनेट पर प्रतिबंध के बावजूद अफवाह फैलाने वाले सक्रिय

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श्रीनगर : कश्मीर घाटी में इंटरनेट पर पिछले सात दिनों से जारी प्रतिबंध के बाबजूद अफवाह फैलाने वाले लोग सक्रिय हैं।

पिछले शनिवार को पुलवामा में सुरक्षा बलों और पुलिस की कार्रवाई में लगभग 60 छात्रों के घायल होने के बाद विरोध प्रदर्शन में बढ़ोत्तरी दर्ज होने के उपरांत सरकार ने पिछले सात दिनों से घाटी में सरकारी सेवा प्रदाता कम्पनी बीएसएनएल समेत सभी मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है।

सोशल नेटवर्किंग पर द्वारा अफवाहों के फैलने से रोकने के लिए सरकार ने बीएसएनएल समेत सभी मोबाइल प्रदाता कम्पनियों को निर्देश देकर कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने को कहा है। लोग सोशल मीडिया पर घाटी में सुरक्षा बलों द्वारा युवाओं पर कथित अत्याचार करते हुए दिखाने वाली तस्वीरें फैला रहे हैं।

बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड सेवा और अन्य स्थानीय संचार सेवाएं हालांकि सुचारू रूप से लेकिन धीमी गति से काम करेंगी।
सरकार ने अफवाहें फैलने डर से मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, इसके बाबजूद कल एक लड़की के घायल होने की अफवाह फैल गयी थी। पुलिस ने हालांकि इस खबर को नकार दिया है।

पुलिस प्रवक्ता ने तुरंत प्रतिक्रिया स्वरूप कहा कि 17 अप्रैल को कुछ अराजक तत्वों ने सकेदफर सफकदल में पत्थरबाजी के दौरान पत्थर लगने से घायल हुई हवल निवासी मो। सिदिक मिसगर की पुत्री कु। इकरा को लेकर अफवाह फैलाई है। इकरा का इलाज एसएमएचएस अस्पताल में चल रहा है और उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। सारी अफवाहें आधारहीन हैं।

इंटरनेट सेवाओं के बंद होने से व्यापारियों, पत्रकारों,छात्रों और अन्य लोगों को प्रभावित किया है। छात्रों के अनुसार मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगने से उनकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा है।

श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान भी किसी अफवाह से बचने के लिए आठ अप्रैल से मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया था जो 13 अप्रैल से बहाल कर दी गयी थी। पुलवामा में हुई घटना के बाद 16 अप्रैल से यह प्रतिबंध दोबारा लागू कर दिया गया था।

– वार्ता

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