हां! मैंने तुड़वाया बाबरी ढांचा

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फैजाबाद : अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने शुक्रवार को फैजाबाद में आयोजित एक प्रेस वार्ता में दावा किया कि कारसेवकों को उकसाकर विवादित ढांचा उन्होंने तुड़वाया था, इस प्रकरण में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी जरा भी दोषी नहीं हैं। अयोध्या के विवादित ढांचा गिराने की साजिश में सीबीआई जांच में भारतीय जनता पार्टी से दो बार सांसद रहे डा. रामविलास दास वेदांती को भी शामिल किया गया है।  राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता डॉ. वेदांती ने दावा किया कि 6 दिसंबर 1992 को उन्होंने ‘एक धक्का और दो, बाबरी को तोड़ दो।’

कहकर कारसेवकों को उकसाकर विवादित ढांचा तुड़वाया था। नयाघाट स्थित अपने आवास ‘हिन्दूधाम’ में पत्रकारों से मुखातिब डाक्टर वेदांती ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत 13 नेताओं के खिलाफ ध्वंस की साजिश रचने का मामला चलाए जाने की सीबीआई को इजाजत दी गई है। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जब कारसेवक ढांचा तोड़ रहे थे उस समय विहिप नेता अशोक सिंहल, महंत अवैद्यनाथ एवं मैं नारा लगवा रहे थे कि ‘ढांचा जल्दी तोड़ो, जब तक यह नहीं टूटेगा मंदिर निर्माण नहीं होगा।’

उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में मौजूद कार सेवकों ने मेरे और स्वर्गीय अशोक सिंहल के उकसाने पर ही विवादित ढांचा गिराया था। मैंने ही कहा था ‘एक धक्का और दो, बाबरी को तोड़ दो।’ जबकि लालकृष्ण आडवाणी, डॉ.मुरली मनोहर जोशी और विजयाराजे सिंधिया तो उस समय कारसेवकों को समझाने का प्रयास कर रहे थे । डॉ. वेदांती के अनुसार विवादित ढांचे से कुछ ही दूर स्थित मंच पर मौजूद आडवाणी, जोशी आदि नेता कारसेवकों से अनुरोध कर रहे थे कि आप की कारसेवा हो गई है और आप ढांचे से उतर आइये। इस प्रकरण में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बिल्कुल भी दोषी नहीं हैं, वह तो बेकसूर हैं।

तल्ख लहजे में डॉ. वेदांती ने स्वीकार किया कि हां! कारसेवकों को उकसाकर मैंने बाबरी ढांचा तुड़वाया है। इसके लिए यदि कोर्ट फांसी की सजा मुझे दे तो मैं फांसी पर लटकने को भी तैयार हूं। उन्होंने कहा कि मैं रामलला से यह प्रार्थना जरूर करूंगा कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार को ऐसी दिशा मिले कि रामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने सरकार से विवादित स्थल के इर्द-गिर्द अधिग्रहीत 67.77 एकड़ जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने की भी मांग की, ताकि इस भूमि पर जल्द से जल्द राममंदिर निर्माण शुरू किया जा सके।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों को चुनौती दी कि ध्वंस के समय के साक्ष्यों का अयोध्या आकर पुनर्वलोकन करें। सीबीआई की नीयत पर भी सवाल खड़ा करते हुए डॉ.वेदांती ने कहा कि सीबीआई की झूठी गवाही पर जजों ने फिर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। वेदांती का आया यह बयान बीजेपी और विहिप के वरिष्ठ नेताओं को बचाने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बुधवार को 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा था कि बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाया जाएगा।

इस मामले में सिर्फ कल्याण सिंह को इम्युनिटी दी गई है क्योंकि वो गवर्नर हैं हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि श्री सिंह इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं। डॉ. रामविलासदास वेदांती ने 6 दिसंबर 1992 को जो इमारत ध्वस्त की गई थी उसे मस्जिद मानने से ही इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह मंदिर था और जर्जर होने की वजह से रामभक्तों ने उसे ढहा दिया ताकि भव्य राममंदिर का निर्माण हो सके। डॉ. वेदांती ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वह ढांचा मस्जिद का था। उसमें मीनार नहीं थी, उसमें हिंदू देवी देवताओं के प्रतीक चिह्न थे। साथ ही परिक्रमा मार्ग और अमृत कलश भी थे जो किसी मस्जिद में होना असंभव है।

– (जेएनएन)

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