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बर्ड फ्लू के मद्देनजर शिवसेना ने कसा BJP पर तंज, पक्षियों की मौत के पीछे भी पाकिस्तान या खालिस्तान का हाथ?

कोरोना महामारी के कहर के बीच देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू लगातार बढ़ रहा है, इसी बीच भारत में बढ़ते बर्ड फ्लू को लेकर शिवसेना ने बीजेपी पर निशाना साधा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में लिखा है कि सरकारी लोगों का कहना है कि सरकारी लोग किसान आंदोलन के पीछे पाकिस्तान, खालिस्तान और माओवादियों का हाथ बताते हैं लेकिन अब देश में इतनी मुर्गियां और पक्षी मर रहे हैं, इनके पीछे किसका हाथ है? सामना में शिवसेना ने लिखा है, 'सरकारी लोगों का कहना है कि किसानों के आंदोलन के पीछे पाकिस्तानी, खालिस्तानी, चीनी, नक्सलवादी और माओवादियों का हाथ है। अब जो ये मुर्गियां और पक्षी मर रहे हैं, उनके इस रहस्यमय हत्याकांड में भी खालिस्तानी, पाकिस्तानी और नक्सलवादियों का हाथ है, ऐसा भाजपा प्रवक्ता ने घोषित नहीं किया, ये बड़ी बात है।'

इसके साथ ही शिवसेना ने सामना में यह भी लिखा है कि 'बर्ड फ्लू के मद्देनजर चिकन बिक्री में 40 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इसकी आर्थिक मार समाज के एक बड़े वर्ग पर पड़ रही है। कोरोना वैक्सीन के उत्सव के दौरान ही यह नया संकट फड़फड़ाने लगा। इस बर्ड फ्लू संकट के कारण मुर्गियां और पक्षी मर रहे हैं, इससे इंसान खुश न हों। मुर्गियां, पक्षी और प्रकृति मानवीय जीवन का अंग हैं। यह प्रकृति का संतुलन बिगाड़ने वाली घटना है। एक तो पहले से ही बरसात के कारण अंगूर, काजू और अन्य फलों का उत्पादन संकट में है, उस पर बर्ड फ्लू से मुर्गियों पर भी खतरा आन पड़ा है। महाराष्ट्र में लातूर, बीड और नगर आदि क्षेत्रों में मुर्गियां और पक्षी मरने लगे लेकिन देश में केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बर्ड फ्लू फैलाने की बात केंद्र सरकार द्वारा बताए जाने के बाद चिंता बढ़ गई है।'

इसके आगे शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीनों 'नए कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे हैं, इसी दौरान बर्ड फ्लू का नया संकट टूट पड़ा है। किसान हर स्तर पर मुश्किल में फंसा हुआ है। आसमान फटने के बाद बचाव कहां और कैसे करें, उनका यही प्रयास चल रहा है। अंडों का व्यापार थोक तथा खुदरा व्यापार है। ऐसे भी कई लोग हैं, जो दिनभर में कुछ अंडे बेचकर भी अपने घर का चूल्हा जला लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घर में ही पाली गई मुर्गियों और अंडे बेचनेवालों की संख्या ज्यादा है। उनका अपना एक अर्थशास्त्र है और गरीब अंडा विक्रेता की अर्थव्यवस्था के लिए नए कृषि कानून में कोई स्थान नहीं है। नए कृषि कानून के अनुसार ‘बर्ड फ्लू’ की शिकार मुर्गियों और अंडों को तुम्हारे कॉर्पोरेट हाथ भी नहीं लगाएंगे। फिर मुर्गियों तथा अंडों का उत्पादन अर्थात पोल्ट्री फार्मिंग करने वाले किसानों को कौन सहारा देगा?'