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TOP 5 NEWS 20 JANUARY : आज की 5 सबसे बड़ी खबरें ◾कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान में अब तक 6.31 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया◾मोदी आज प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों को जारी करेंगे वित्तीय सहायता ◾आज का राशिफल (20 जनवरी 2021)◾कांग्रेस की बनाई भारत की छवि को नष्ट कर रहे प्रधानमंत्री : राहुल◾SC द्वारा गठित समिति कृषि कानून पर उत्पन्न संकट सुलझा नहीं पाएगी : बादल◾सोनिया ने केरल में चांडी की अगुवाई में बनाई चुनाव प्रबंधन समिति◾राहुल ने जारी किया 'खेती का खून' बुकलेट, जावड़ेकर बोले-कांग्रेस को खून शब्द से बहुत प्यार◾राहुल का वार- हिंदुस्तान के पास नहीं है कोई रणनीति, स्पष्ट संदेश नहीं दिया तो चीन उठाएगा फायदा ◾कृषि कानून पर SC द्वारा गठित समिति के सदस्यों की पहली बैठक, घनवट बोले- निजी राय को नहीं होने देंगे हावी ◾पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी का BJP पर जोरदार हमला, बताया नक्सलियों से ज्यादा खतरनाक◾कोविशील्ड के इस्तेमाल से कोई गंभीर एलर्जी की दिक्कत वाले लोग वैक्सीन नहीं लें : सीरम इंस्टीट्यूट ◾राहुल गांधी ने जारी की 'खेती का खून' बुकलेट, कहा- कृषि क्षेत्र पर पूंजीपतियों का हो जाएगा एकाधिकार ◾ब्रिस्बेन में चौथे टेस्ट में जीत के साथ भारत ने रचा इतिहास, कंगारुओं को सिखाया सबक ◾चीन मुद्दे को लेकर नड्डा के निशाने पर राहुल, पूछा-झूठ बोलना कब बंद करेगी कांग्रेस?◾BJP सांसद का पलटवार- 80 के दशक से जमीन पर कब्जा करके बैठा है चीन, कांग्रेस ने क्यों नहीं की कार्रवाई ◾2019 में TMC को किया आधा, 2021 में कर देंगे सफाया : दिलीप घोष◾अरुणाचल प्रदेश में चीन के गांव को बसाए जाने की रिपोर्ट पर सियासत तेज, राहुल ने PM पर साधा निशाना ◾देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के नए मामले 10 हजार से कम, 137 लोगों ने गंवाई जान ◾कांग्रेस मुख्यालय में आज राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कृषि कानूनों पर जारी करेंगे बुकलेट◾

भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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पीएम मोदी को किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानूनों को खत्म कर देना चाहिए : शिवसेना

शिवसेना ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आंदोलनरत किसानों की भावनाओं का सम्मान करने और नए विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा करने से उनका कद और बड़ा हो जाएगा। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में केंद्र सरकार पर उच्चतम न्यायालय का इस्तेमाल कर किसानों के प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया। संपादकीय में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष केंद्र का यह दावा भी चौंकाने वाला है कि किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तानी घुसे हुए हैं। 

उसमें यह आरोप लगाया गया, "यदि खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ की है, तो यह सरकार की ही विफलता है। सरकार विरोध को समाप्त नहीं करना चाहती है और आंदोलन को देशद्रोह का रंग देकर राजनीति करना चाहती है।" गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अगले आदेश तक नए कृषि कानूनों के लागू करने पर रोक लगा दी और दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदार्शन कर रहे किसानों की यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध को हल करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला किया। 

संपादकीय में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद इस मुद्दे पर गतिरोध जारी है । किसान यूनियनों ने समिति के चार सदस्यों से बात करने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने पहले कथित रूप से कृषि कानूनों का समर्थन किया था। 

सामना में कहा गया, "प्रधानमंत्री मोदी को किसानों के विरोध और साहस का स्वागत करना चाहिए। उन्हें किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानूनों को खत्म कर देना चाहिए। मोदी का आज जितना बड़ा कद है, ऐसा करने से उनका कद और बड़ा हो जाएगा।" 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की निर्धारित ट्रैक्टर रैली का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया कि अगर सरकार चाहती है कि स्थिति और न बिगड़े, तो किसानों की भावनाओं को समझने की जरूरत है। उसमें कहा गया कि इस प्रदर्शन में अब तक 60 से 65 किसानों की जान जा चुकी है और देश ने आजादी के बाद अब तक ऐसा अनुशासित आंदोलन नहीं देखा है।