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उत्तराखंड: तीर्थयात्री जा सकेंगे चारधाम यात्रा पर, हाईकोर्ट ने हटाया प्रतिबंध

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के चलते सभी धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया था। जो अब तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए गया है। देश की ऐतिहासिक चारधाम यात्रा पर असीमित संख्या में तीर्थयात्री जा सकेंगे। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तीर्थयात्रियों की संख्या पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया।

तीर्थयात्रियों को अब नहीं कराना होगा पंजीकरण-

तीर्थयात्रियों के लिये अब पंजीकरण कराना आवश्यक नहीं है। चारधाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिये आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट साथ लाना अनियार्य है। अदालत ने सरकार को चारधाम यात्रा में सुविधाओं में बढ़तरी करने के भी निर्देश दिये हैं। अब श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई रोक नहीं रहेगी। मामले की सुनवाई आज मुख्य न्यायाधीश आर एस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में हुई।

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सरकार की ओर से पिछले सप्ताह एक प्रार्थना पत्र देकर अदालत से पुराने आदेश में संशोधन कर तीर्थयात्रियों की सीमित संख्या पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की गयी थी। सरकार की ओर से महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) एसएन बाबुलकर और मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएसी) चंद्रशेखर रावत की ओर से कहा गया कि तिरुपति बाला जी धाम और सोमनाथ मंदिरों में तीर्थयात्रियों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा है।

तिरुपति धाम में 28 हजार तीर्थयात्री और सोमनाथ मंदिर में 18 हजार से अधिक तीर्थयात्री प्रतिदिन दर्शन को जा रहे हैं। सरकार कोरोना मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करा रही है।

पंजीकरण की बाध्यता के चलते चारधाम यात्रा में नहीं आ रहे तीर्थयात्री- सरकार 

देश में कोरोना का ग्राफ निरतंर कम हो रहा है और सभी सेक्टर खुले हुए हैं। स्कूल एवं कॉलेज में भी शैक्षणिक गतिविधियों के लिये खुल गये हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की संख्या को सीमित करना यात्रा से जुड़ कारोबारियों के खिलाफ अन्याय है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पंजीकरण की बाध्यता के चलते चारधाम यात्रा में तीर्थयात्री नहीं आ पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तय संख्या से भी कम यात्री चारधाम दर्शन को पहुंच रहे हैं। अब यात्रा में एक महीने से भी कम समय रह गया है। ऐसे में प्रतिबंध को हटाया जाना यथोचित होगा।

तीर्थयात्रियों की सीमित संख्या पर लगे प्रतिबंध को हटाया गया-

याचिकाकर्ता सचिदानंद डबराल की ओर से हालांकि कहा गया कि सरकार की ओर से अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। चारधाम यात्रा मार्ग एवं चारों धामों में सुविधाओं को लेकर वेबसाइट पर कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बाद अदालत ने अपने 16 सितम्बर के आदेश में संशोधन करते हुए तीर्थयात्रियों की सीमित संख्या पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है।

अदालत ने सरकार को यह भी निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों की सुविधा को देखते हुए चिकित्सा सुविधाओं एवं ठहरने की सुविधाओं में बढ़तरी सुनिश्चित करे। साथ ही गर्भावस्था वाली महिलाओं, बच्चों और वृद्ध तीर्थयात्रियों को देखते हुए चिकित्सा सुविधा में बढ़तरी करें। गंभीर स्थिति में तीर्थयात्रियों के लिये हेलीकाप्टर की सेवा भी उपलब्ध करायें।

एसओपी का पालन भी सुनिश्चित करे सरकार- अदालत

अदालत ने सरकार को एसओपी का पालन भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि सरकार चारधाम यात्रा को लेकर गंभीर दिखायी दे रही है और खुद मुख्यमंत्री पुश्कर सिंह धामी ने चारधाम में आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा को देखते हुए स्वयं अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं। अदालत ने अंत में तीर्थयात्रियों की संख्या पर से रोक हटा दी है। सरकार की ओर से इसे बड़ कदम माना जा रहा है।