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अभिनेत्री कंगना ने किया 'भीख में मिली आजादी' वाले विवादित बयान का बचाव, इंस्टाग्राम पोस्ट कर कही ये बात

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने 'भीख में मिली आजादी' वाले अपने विवादित बयान का बचाव किया है। कंगना ने हाल ही में कहा था कि भारत को 1947 में आजादी भीख में मिली थी और भारत को असल आजादी 2014 के बाद ही मिली है। अभिनेत्री के इस बयान ने हलचल मचा दी है और उनके इस बयान की काफी आलोचना भी हो रही है। कंगना हाल ही में एक मीडिया समिट में बोल रही थीं, जब उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा था, भारत को सच्ची आजादी 2014 में ही मिली थी।

कई राजनेताओं ने उनसे माफी की मांग की है और हाल ही में उन्हें प्रदान किए गए पद्म श्री पुरस्कार को वापस लौटाने की भी बड़े स्तर पर मांग की जा रही है। कई राजनेताओं और अन्य लोगों का कहना है कि उनका बयान उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान करता है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। हालांकि अब कंगना ने अपने बयान के पक्ष में एक लंबी इंस्टाग्राम पोस्ट लिखी है।

अब, अभिनेत्री ने सामने आकर अपने इंस्टाग्राम पर तस्वीरों की एक सीरीज के माध्यम से अपना बचाव किया है। उनकी पहली तस्वीर एक लेख का स्क्रीनशॉट है। कंगना ने अपनी पोस्ट में लिखा, क्यों और कैसे गोरे साम्राज्यवादी और उनके समर्थक ऐसी बकवास लिख सकते हैं? अगर आप पता लगाने की कोशिश करें तो जवाब मीडिया चैनल को दिया गया मेरा बयान है।

वह आगे कहती हैं, ऐसा इसलिए है, क्योंकि हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने भारत में किए अनगिनत अपराधों के लिए अंग्रेजों को दोषी नहीं ठहराया। उन्होंने बुरी तरह देश की संपत्ति को लूटा और हमें दो हिस्सों में तोड़ने के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की हत्या की। दूसरे विश्व युद्ध के बाद अंग्रेज अपनी मर्जी से भारत छोड़कर गए थे और विंस्टन चर्चिल को तब एक युद्ध नायक (वॉर हीरो) के तौर पर पेश किया गया था।

कंगना ने अपनी पोस्ट में आगे लिखते हुए कहा, यह वही व्यक्ति था, जो बंगाल के अकाल के लिए जिम्मेदार था और स्वतंत्र भारत में कभी उसे उसके अपराधों के लिए दोषी नहीं ठहराया गया? नहीं एक गोरा अंग्रेज सिरिल रैडक्लिफ जो कभी पहले भारत में नहीं आया, उसे अंग्रेज केवल 5 हफ्ते में बंटवारे की लाइन खींचने के लिए लेकर आए।

अपने विवादित बयान का पक्ष लेते हुए कंगना ने इस मुद्दे पर आगे कहा, कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों इस समिति के सदस्य थे और उन्होंने अंग्रेजों की शर्तों के मुताबिक बंटवारे को स्वीकार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग दस लाख लोग मारे गए। क्या उन मरने वाले लोगों को स्वतंत्रता मिली? क्या अंग्रेज या आईएनसी (कांग्रेस), जो इस बंटवारे के लिए सहमत हो गए थे, उन्हें इस हत्याकांड के लिए जिम्मेदार ठहराया गया?

सीरीज की अन्य तस्वीरें स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गए एक पत्र और एक संपादकीय की हैं, जिसमें कहा गया है कि भारत ने वास्तव में 2014 में स्वतंत्रता प्राप्त की थी। अभिनेत्री आगे लिखती हैं, हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की ओर से 28 अप्रैल 1948 को ब्रिटिश सम्राट को लिखा गया एक पत्र है, जिसमें भारत के गवर्नर-जनरल के रूप में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन गवर्नर की नियुक्ति के लिए ब्रिटिश स्वीकृति का अनुरोध किया गया है।

वह आगे कहती हैं, पत्र मेरी पोस्ट की दूसरी तस्वीर में देखा जा सकता है। यदि ऐसा कोई पत्र मौजूद है, तो क्या आप मानते हैं कि कांग्रेस ने अंग्रेजों को उनके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराने का प्रयास किया था? यदि हां, तो कृपया बताएं कि मेरा बयान आखिर कैसे गलत है!

अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में निष्कर्ष निकालते हुए सवाल पूछा, क्या स्वतंत्र भारत के लिए अपनी जान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को पता था कि ब्रिटिश और हमारे राष्ट्र-निर्माता अविभाजित भारत को दो भागों में विभाजित करेंगे, जिसके परिणामस्वरूप दस लाख लोगों का नरसंहार होगा? मैं यह कहते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहूंगी कि अगर हम भारत में किए गए कई अपराधों के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार न ठहराएं, तो फिर हम अभी भी अपने स्वतंत्रता सेनानियों का अनादर कर रहे हैं। जय हिंद।