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बीएल संतोष के त्रिपुरा दौरे के बाद BJP में बढ़ी उथल-पुथल, CM बिप्लब के निरंकुश शासन से अराजकता का माहौल

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष के त्रिपुरा दौरे के बाद पार्टी में उथल-पुथल बढ़ गई है। बी एल संतोष ने त्रिपुरा मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव के खिलाफ पार्टी में पसरे असंतोष को समाप्त करने के लिए विधायकों, सांसदों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बातचीत की जिसके बाद पार्टी में उथल-पुथल और बढ़ गई है। भाजपा के मौजूदा संकट को दूर करने के लिए संतोष ने दो दिन पहले राज्य का दौरा किया था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ माणिक साहा ने हालांकि मीडिया से दावा किया कि पार्टी में कोई संकट नहीं है, नेताओं के एक वर्ग के बीच पार्टी के कामकाज को लेकर कुछ मतभेद हैं। 

भाजपा विधायकों के एक समूह ने शुक्रवार को फिर से एक समीक्षा बैठक की और कहा जाता है कि उन्होंने फैसला किया अगर केंद्र ने तुरंत मुख्यमंत्री नहीं बदला तो पार्टी छोड़ दी जाए। भाजपा के एक वरिष्ठ विधायक ने नाम उजागर नहीं किये जाने की शर्त पर कहा,‘‘ बिप्लब कुमार देव के निरंकुश शासन के खिलाफ पार्टी में पूरी तरह से अराजकता है, जिसे अब सभी के लिए खोल दिया गया है। नतीजतन, पार्टी के निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं का वर्तमान नेतृत्व से विश्वास उठ गया है और पार्टी और सरकार के बीच कोई समन्वय नहीं है। 

मुख्यमंत्री की सनक आसानी से पार्टी अध्यक्ष लागू कर देते हैं जिसने संगठन को नष्ट कर दिया है।’’उन्होंने कहा कि उनकी बैठक में मुख्यमंत्री नहीं बदले जाने पर भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई है। उन्होंने कहा,‘‘अगर यह स्थिति बनी रहती है तो हमारे पास 2023 के विधानसभा चुनाव में 10 से अधिक सीटें जीतने का कोई मौका नहीं है। साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर पार्टी अध्यक्ष ने बिना विधायकों से सलाह-मशविरा किए मंडल अध्यक्ष और अन्य निर्वाचन क्षेत्र स्तर के नेताओं की नियुक्ति कर दी है। 

इससे संकेत स्पष्ट है कि जो विधायक सीएम लॉबी से संबंधित नहीं हैं, उन्हें चुनाव लड़ने का टिकट नहीं मिलेगा और सीएम हम में से कई लोगों को पहले ही बता चुके हैं।’’ विधायक ने कहा कि विधायकों को छोड़कर राज्य समिति ने जनता को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी का आधार नष्ट हो गया है। 

उन्होंने कहा,‘‘अधिकांश विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र में सहज नहीं हैं, इसलिए यदि उन्हें टिकट मिलता है, तो शायद ही जीतने का कोई मौका मिलेगा क्योंकि भाजपा-आईपीएफटी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर शुरू हो गई है। पिछले साढ़ तीन साल में हम अपने चुनावी वादों का 10 फीसदी भी पूरा नहीं कर सके।’’ विधायक ने कहा,‘‘सीएम लॉबी के साथ रहे तीन-चार विधायकों को छोड़कर, अन्य सभी ने सरकार के वर्तमान स्वरूप के खिलाफ बात की है और त्रिपुरा में भाजपा के हित के लिए मुख्यमंत्री बदलने के पक्ष में अपना विचार व्यक्त किया है। फिर भी, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही निर्णय नहीं लेता है तो अधिकतर विधायकों के पास विकल्प तलाशने के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचा है।