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MP में विधानसभा चुनावों से पूर्व शुरू हुई BJP की जमीनी तैयारी, पार्टी दे रही अपनी तमाम इकाइयों को नया रूप

2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का संगठन जमीनी स्तर पर और मजबूती लाने की कोशिश में जुटा हुआ है। यही कारण है कि संगठन अपनी तमाम इकाइयों को नया रूप देने के साथ जिम्मेदारियां भी सौंप रहा है। राज्य में प्रदेशाध्ययक्ष की कमान संभाले विष्णु दत्त शर्मा को लगभग डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया है। शुरूआती दौर चुनौती भरा था, यही कारण था कि कुछ पदाधिकारियों की नियुक्ति भी उनके लिए आसान नहीं थी, मगर वक्त गुजरने के साथ उनकी संगठन में पकड़ मजबूत होती गई। 

पार्टी हाईकमान का भरोसा उन पर और बढता गया यही कारण है कि बीते 2 माह की अवधि में उन्होंने बड़ी संख्या में नियुक्तियां कर दी है। भाजपा के मुख्य संगठन में लगभग सभी पदों पर नियुक्ति के साथ कार्यसमिति का भी गठन हो चुका है तो वही अधिकांश मोर्चा के अध्यक्ष और उनकी कार्यकारिणी बन चुकी है । इसके अलावा पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठ के संयोजक भी बना दिए गए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो पार्टी की संगठनात्मक संरचना के मुताबिक हर स्थान और जगह पर व्यक्ति की तैनाती हो चुकी है।

भाजपा की मध्य प्रदेश की सियासत में यह पहला अवसर होगा जब दूसरे दल से आए लोगों को भी समायोजित करने की चुनौती थी, इसके बावजूद संगठन अपनी गति से लगातार आगे बढ़ रहा है और सभी को समायोजित करने की कोशिश भी हुई है, यह इकाइयों के गठन में यह नजर भी आ रहा है।

बीते डेढ साल के हालात पर नजर दौड़ाएं तो पहले सत्ता में भाजपा की वापसी हुई, फिर कोरोना मुसीबत बनकर आया। इन हालात में संगठन का सारा जोर आम लोगों की जरूरत और उनकी समस्याओं के निदान पर था, यही कारण रहा कि प्रदेश अध्यक्ष शर्मा से लेकर संगठन के तमाम लोग सरकार के साथ हाथ से हाथ मिला कर खड़े रहे और जरूरतमंदों की हर संभव मदद करने की कोशिशें हुई।

कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के बाद जैसे ही हालात सामान्य हुए कि भाजपा ने अपनी संगठनात्मक संरचना को स्वरूप देना शुरू कर दिया, अब तो पार्टी के लगभग सभी पदों पर नियुक्तियां हो चुकी है। भाजपा संगठन की नजर आगामी समय में होने वाले खंडवा लोकसभा क्षेत्र के अलावा रैगांव, पृथ्वीपुर और जोबट विधानसभा क्षेत्रों पर है। साथ ही नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव को भी गंभीर मानकर चल रही है पार्टी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का राज्य में स्वरूप तेजी से बदल रहा है, यहां नई पीढ़ी को जगह दी जा रही है। कई बार तो ऐसे लगता है जैसे मानो संगठन का पीढ़ी हस्तांतरण हो रहा हो, संगठन में अधिकांश पदाधिकारी 50 वर्ष की आयु के आसपास के हैं। यह काम किसी पार्टी के लिए कोई आसान नहीं है। इन स्थितियों में पुराने या बुजुर्ग नेता मुसीबत भी खड़ी कर सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में भाजपा बतौर प्रयोगशाला यह सारे प्रयोग कर रही है।