शिवराज कैबिनेट में महाकौशल की अनदेखी से नाराज BJP विधायक ने खोला मोर्चा, कांग्रेस ने ली चुटकी

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मध्य प्रदेश कैबिनेट का तीसरा विस्तार हो चुका है। कैबिनेट में दो विधायकों, गोविंद सिंह राजपूत व तुलसी सिलावट को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। कई और दावेदार थे मगर वे जगह नहीं हासिल कर पाए।

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार ने 3 जनवरी को तीसरी बार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। राज्य सरकार के इस विस्तार के खिलाफ बीजेपी में असंतोष के स्वर मुखर होने लगे है। पूर्व मंत्री और जबलपुर से विधायक अजय विश्नोई ने महाकौशल और विंध्य की उपेक्षा को लेकर तंज कसा है। इस मौके को लपकते हुए कांग्रेस ने भी चुटकी ली। 
कैबिनेट का तीसरा विस्तार हो चुका है। कैबिनेट में दो विधायकों,  गोविंद सिंह राजपूत व तुलसी सिलावट को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। कई और दावेदार थे मगर वे जगह नहीं हासिल कर पाए। इस पर पूर्व मंत्री विश्नेाई ने ट्वीट करते हुए कहा, महाकौशल अब उड़ नहीं सकता, फड़फड़ा सकता है! मध्यप्रदेश में सरकार का पूर्ण विस्तार हो गया है। ग्वालियर, चंबल, भोपाल, मालवा क्षेत्र का हर दूसरा बीजेपी विधायक मंत्री है। सागर, शहडोल संभाग का हर तीसरा बीजेपी विधायक मंत्री है। 


उन्होंने इस ट्वीट में महाकौशल और विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा की ओर इशारा करते हुए आगे लिखा है, महाकौशल के 13 बीजेपी विधायकों में से एक को तथा रीवा संभाग में 18 बीजेपी विधायकों में से एक को राज्य मंत्री बनने का सौभाग्य मिला है। महाकौशल और विंध्य अब फड़फड़ा सकते हैं उड़ नहीं सकते। महाकौशल और विंध्य को अब खुश रहना होगा। खुशामद करते रहना होगा। बधाई। 

पूर्व मंत्री विश्नोई के इन ट्वीट पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने भी चुटकी लेते हुए रिट्वीट किया और लिखा है, उसूलों पे जहां आंच आये, टकराना जरूरी है, जो जिन्दा हों तो फिर जिंदा नजर आना जरूरी है। नई उम्रों की खुदमुख्तारियों को कौन समझाये, कहां से बच के चलना है कहां जाना जरूरी है। ज्ञात हो कि राज्य में पिछले साल मार्च महीने में बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई थी, तब मुख्यमंत्री के तौर पर चौथी बार शिवराज सिंह चैहान ने शपथ ली थी। उसके बाद अप्रैल में पांच मंत्रियों के शपथ लेने पर पहला विस्तार हुआ था, फिर दूसरा विस्तार जुलाई में हुआ था और 28 मंत्रियों ने शपथ ली थी। 
हाल ही में हुए विधानसभा के उप-चुनाव में तीन मंत्री को हार मिली और उन्हें पद छोड़ना पड़ा, वहीं तुलसी राम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत बगैर विधायक रहते छह माह तक मंत्री रहे और उसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब इन दोनों को मंत्री पद की शपथ दिलाकर शिवराज ने अपने मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार किया है। 

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