जावेद अख्तर ने दिया बड़ा बयान : बुर्का और घूंघट एक बात, दोनों को हटाया जाए

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जावेद अख्तर ने कहा, ‘आजादी के बाद यह चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है और मेरा भोपाल से रिश्ता है, इसलिए मेरा यह कत्र्तव्य बनता था कि लोगों से बात करने यहां आऊं।’

मुस्लिम महिलाओं के बुर्के को लेकर चल रही बहस के बीच प्रसिद्घ गीतकार जावेद अख्तर ने बुर्का और घूंघट को एक जैसा बताते हुए दोनों को हटाने की पैरवी की है। संवाददाताओं ने यहां उनसे शिवसेना के मुख पत्र सामना में बुर्के पर प्रतिबंध लगाए जाने का जिक्र किए जाने से संबधित सवाल पूछा, जिस पर उन्होंने कहा, ‘मेरे घर में सभी महिलाएं कामकाजी रही हैं, मां भोपाल के हमीदिया कॉलेज में पढ़ाती थीं, घर में कभी बुर्का देखा नहीं, इसलिए बुर्के के मामले में मेरी जानकारी कम है।’

जावेद अख्तर

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘बुर्के को लेकर भी बहस है, ईरान कट्टर मुस्लिम देश है, लेकिन वहां महिलाएं चेहरा नहीं ढकती। श्रीलंका में जो कानून आया, उसमें भी है कि औरतें चेहरा नहीं ढक सकती। आप चाहे जो पहनें मगर चेहरा कवर नहीं होना चाहिए, आपका चेहरा खुला होना चाहिए।

जावेद अख्तर statement

जावेद अख्तर ने आगे कहा , ”यहां भी अगर ऐसा कानून लाना चाहते हैं और यह किसी की राय है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इससे पहले कि राजस्थान में चुनाव का आखिरी चरण हो जाए उससे पहले इस केंद्र सरकार को ऐलान करना होगा कि राजस्थान में भी कोई महिला घूंघट नहीं लगा सकती।’

जावेद अख्तर ने कहा, ‘चेहरे बुर्के से कवर होंगे या घूंघट से, यह एक बात है। अगर बुर्के और घूंघट हट जाएं तो मुझे खुशी होगी।’ बीजेपी की तरफ से भोपाल से साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ाए जाने पर चर्चा करते हुए जावेद अख्तर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि बीजेपी ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाकर अपनी हार मान ली है।

javed akhtar

बीजेपी ने यह मान लिया है कि अब अपने को अच्छा दिखाने का ड्रामा नहीं करना चाहिए और असल मुद्दे पर आ जाना चाहिए, वही चुनाव में काम आएगा। अभी तक जो पर्दा ओढ़ा गया था, उसे हटा दिया गया है।

जावेद अख्तर statement

बीजेपी को अगर जरा सा भी जीतने का विश्वास होता तो वह प्रज्ञा ठाकुर को टिकट नहीं देते। उन्हें भी प्रज्ञा को उम्मीदवार बनाने में तकलीफ हुई होगी, मगर मजबूरीवश उन्हें ऐसा करना पड़ा होगा।

javed akhtar

जावेद अख्तर ने कहा, ‘आजादी के बाद यह चुनाव सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है और मेरा भोपाल से रिश्ता है, इसलिए मेरा यह कत्र्तव्य बनता था कि भोपाल के लोगों से बात करने यहां आऊं।’ जावेद अख्तर ने इसके साथ ही राजनेताओं के भाषा के गिरते स्तर पर चिंता जताई।

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