गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को देशद्रोह के एक मामले में असम के साहित्यकार हीरेन गोहेन और केएमएसएस नेता अखिल गोगोई को अंतरिम जमानत जबकि वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंत को नियमित जमानत दी।

यह मामला नागरिकता विधेयक के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर असम पुलिस ने दर्ज किया है। न्यायमूर्ति एच के शर्मा ने गोहेन और आरटीआई कार्यकर्ता एवं कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के प्रमुख गोगोई को पांच-पांच हजार रुपये के मुचलके पर अंतरिम जमानत मंजूर की। उन्होंने पुलिस को 22 जनवरी तक केस डायरी सौंपने का निर्देश दिया।

महंत को नियमित जमानत दी गई क्योंकि प्राथमिकी में उनके खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप नहीं हैं। पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यहां लतासिल थाने में धारा 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, छेड़ने का प्रयास करना या छेड़ने के लिए उकसाना), 123 (युद्ध छेड़ने की साजिश में मदद करने के लिए इसे छिपाना) और 124 (ए) (देशद्रोह) सहित भादंसं के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था।

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मामला नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सात जनवरी को आयोजित बैठक में इन तीनों द्वारा की गई टिप्पणियों के आधार पर दर्ज किया गया।

लोकसभा में आठ जनवरी को पारित विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किये जाने से वहां से भागकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले गैरमुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान शामिल है।

इन तीनों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने के बाद, राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों ने भाजपा सरकार की कड़ी निंदा की है।

कांग्रेस, एआईयूडीएफ, अगप के साथ केएमएसएस, एएएसयू (आसू) तथा प्रतिबंधित उल्फा ने इन तीनों पर देशद्रोह के आरोप का विरोध किया है और उनकी मांग है कि आरोप तुरंत वापस लिये जाने चाहिए।

असम के कांग्रेस अध्यक्ष रिपुण बोरा ने शुक्रवार को गोहेन से मुलाकात की और कहा कि पार्टी उनके साथ है। गोहेन पर लगे देशद्रोह के आरोप के खिलाफ जोरहाट में एक व्यक्ति ने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया।