कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने बृहस्पतिवार को नोटबंदी को, ”मोदी सरकार की सबसे बड़ी गलती” बताते हुये दावा किया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ी और बेरोजगारी बढ़ गई। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका है। चाहे वह काले धन के उन्मूलन का मामला हो या फिर जाली नोटों के चलन का या नक्सल अथवा आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाने का मामला हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कदम का ऐलान करते हुये तब कहा था कि तब चलन में रहे 500 और एक हजार के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया है। अशोक चव्हाण ने एक बयान में कहा, ”सारी नकदी काला धन नहीं है और न ही सारा काला (धन) नकदी। हमारी अर्थव्यवस्था नकदी आधारित है और लेनदेने के लिए हमेशा रसीद नहीं मिलती। ये सोचना मूर्खता होगी कि ऑटो रिक्शा, छोटी दुकानों और हाटों में कामकाज कालेधन में होता है।”
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नोटबंदी का विश्लेषण करने पर जोर देते हुये उन्होंने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि क्या केंद्रीय मंत्रिमंडल, मुख्य आर्थिक सलाहकार और मंत्रिमंडल की उप समिति को इसकी जानकारी थी। अशोक चव्हाण ने कहा, ”क्या इस पर विचार विमर्श के लिए कोई बैठक हुई थी। क्या कोई इस तरह की बैठक का ब्यौरा उपलब्ध है। नोटबंदी मोदी सरकार की सबसे बड़ी गलती हैं।”
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख ने यह भी कहा कि बीते दो सालों में मुख्य आर्थिक सलाहकार और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, जिन्हें सरकार ने नियुक्त किया था, वे अब इस्तीफा दे चुके हैं। नांदेड़ से लोकसभा सांसद चव्हाण ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में चल रहा मौजूदा घटनाक्रम चिंता का विषय हैं।


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