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धामी ने मोली जिले का दौरा किया और भूस्खलन में मारे गए लोगों के परिजनों से मिले

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को चमोली जिले के आपदा प्रभावित डुंग्री गांव का दौरा किया और हाल में भारी बारिश के दौरान हुए भूस्खलन में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, आपदा प्रबंधन मंत्री डा. धनसिंह रावत और अन्य अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री धामी हाथ में छड़ी लेकर फिसलन भरी खड़ी चढाई पार कर स्वयं स्थिति का जायजा लेने के लिए गांव पहुंचे।

उन्नीस अक्टूबर को गांव में अतिवृष्टि के बाद भूस्खलन के मलबे में एक परिवार के दो सदस्य दब गए थे। उनके परिजनों को सांत्वना देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करेगी। धामी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आपदा राहत कार्यों में किसी भी तरह से संसाधन की कमी नहीं होने दी जाएगी। धामी ने कहा, ‘‘19 तारीख की आपदा में दो व्यक्ति मलबे में दब गए। राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों के साथ है और उनकी हर संभव मदद करेगी।

पूरे प्रदेश में एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की 

डुंग्री गांव में आपदा से नुकसान का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ आपदा राहत कार्यों की समीक्षा की और उन्हें अवरुद्ध मार्गो, क्षतिग्रस्त बिजली और पेयजल लाइनों को जल्द से जल्द बहाल करने तथा आपदा पीड़ित परिवारों तक हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों की जीवन रक्षा के लिए पूरे प्रदेश में एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। प्रभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में दूरसंचार व्यवस्था बाधित हुई है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर डब्लूएलएल फोन की व्यवस्था की जाए। 

सभी सड़कों को गढ्डा मुक्त बनाने के निर्देश

उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सात नवंबर तक सभी सड़कों को गढ्डा मुक्त बनाने के निर्देश दिए और कहा कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न की जाए। मुख्यमंत्री ने आपदा में त्वरित कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन के कार्यों की सराहना की। हाल में राज्य में भारी बारिश से हुई तबाही में 65 लोगों की मृत्यु हो गई और 22 अन्य घायल हो गए जबकि दो व्यक्ति अभी लापता हैं। बारिश में 60 मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

बारिश से आई आपदा में कई हेक्टेयर धान की खड़ी फसल सहित कृषि भूमि और वन भूमि भी बह गयी जबकि कई किलोमीटर सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गयीं। मुख्यमंत्री धामी के अनुसार, 7,000 करोड़ रुपये की क्षति का प्रारंभिक आंकलन किया गया है। इस बीच, कुमाऊ और गढवाल की ऊँची पहाडियों में ट्रैकर्स और पर्यटकों की खोज के लिए तलाशी और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।