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तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ बम्बई HC ने गोवा सरकार की अर्जी स्वीकार की

बम्बई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने 2013 के बलात्कार मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान सम्पादक तरुण तेजपाल को बरी किये जाने को चुनौती देने वाली गोवा सरकार की अर्जी शनिवार को स्वीकार कर ली। सत्र अदालत ने पिछले वर्ष तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसे गोवा सरकार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। तेजपाल ने अर्जी की स्वीकार्यता को चुनौती दी थी।  

अदालत से अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के सूक्ष्म विवरण में जाने की उम्मीद नहीं  

न्यायमूर्ति आर एन लड्ढा और न्यायमूर्ति एम एस सोनाक की पीठ ने शनिवार को राज्य सरकार की ओर से दायर अर्जी स्वीकार कर ली। पीठ ने कहा, ‘‘अदालत से अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के सूक्ष्म विवरण में जाने की उम्मीद नहीं है। इस स्तर पर, यदि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री गहन जांच और पुनर्मूल्यांकन, समीक्षा, या साक्ष्य पर पुनर्विचार की आवश्यकता का खुलासा करती है, तो अपीलीय अदालत को मांग के अनुसार अनुमति देनी चाहिए और योग्यता के आधार पर अपील का फैसला करना चाहिए।’’ 

अदालत ने कहा कि वह न केवल इस आवेदन की स्वीकार्यता के संबंध में प्रतिवादी की ओर से उठाई गई प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज करती है, बल्कि अर्जी स्वीकार करती है तथा सीआरपीसी की धारा 378(3) के तहत अनुमति प्रदान करती है। अदालत ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले में, ऐसा नहीं कहा जा सकता कि बरी करने के खिलाफ अपील का (राज्य सरकार का) निर्णय विवेक के इस्तेमाल के बगैर किया गया या राज्य सरकार ने ऐसा किसी बाहरी अधिकारी के आदेश के तहत किया है।’’  

प्रतिवादी ने किसी भी स्तर पर उन नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया  

अदालत ने तेजपाल को 15 दिनों के भीतर निचली अदालत से जमानत लेने का भी आदेश दिया। खंडपीठ ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड से पता चलता है कि प्रतिवादी को कुछ नियमों और शर्तों के तहत जमानत पर छोड़ा गया था। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह बताता हो कि प्रतिवादी ने किसी भी स्तर पर उन नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया है, जिनके अधीन उसे जमानत पर छोड़ा गया था।’’ उच्च न्यायालय ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए इसे अदालत से प्राप्त करने की तेजपाल की अर्जी भी स्वीकार कर ली। 

पीठ ने निर्देश दिया कि एक बार प्रतिवादी 15 दिनों के भीतर निचली अदालत में पेश हो जाए तो अदालत को उसका पासपोर्ट जारी करने का आदेश देना चाहिए, ताकि वह उसका नवीनीकरण कर सके। गौरतलब है कि 21 मई, 2021 को एक सत्र अदालत ने तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तेजपाल को उस मामले में बरी कर दिया था, जिसमें उनके खिलाफ गोवा में नवम्बर 2013 में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में अपनी तत्कालीन सहयोगी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था।