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महाराष्ट्र सरकार को गिराने की कोशिश करने वालों को फटकार लगाएं राज्यपाल: शिवसेना

एक तरफ जहां महाराष्ट्र कोरोना वायरस से जूझ रहा है और बुरी तरह प्रभावित है वहीं सियासी गलियारों में राजनीतिक उठापठक भी अपने चरम पर है। भाजपा और शिवसेना आमने सामने है और दोनों ही पार्टियों के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने में पीछे नहीं है। भाजपा की तरफ से लगातार हो रहे हमलों का जवाब देते हुए शिवसेना ने बुधवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से अपील की कि वे राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को फटकार लगाएं। 

पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में शिवसेना ने सत्तारूढ़ महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन के पास बहुमत बरकरार रहने का भरोसा जताते हुए कहा कि विपक्षी भाजपा के पास 105 विधायकों का ही समर्थन है। संपादकीय के अनुसार, ''हम उम्मीद करते हैं कि यह अटूट रहे। लेकिन सरकार के पास 170 विधायकों का समर्थन है और अगर कुल 200 विधायक उसके समर्थन में आ जाएं तो वह (विपक्ष) सरकार को दोष न दे।'' 

शिवसेना ने कोश्यारी को सीधी बात करने वाला व्यक्ति बताते हुए कहा कि राज्यपाल को चाहिए कि उन लोगों को फटकार लगाएं जो उनकी शक्तियों के सहारे सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। शिवसेना ने महाराष्ट्र भाजपा के किसी भी नेता का नाम लिये बगैर कहा कि उन्हें महाराष्ट्र की जगह गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग करनी चाहिये। 

महाराष्ट्र में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है, जो अपने छह महीने पूरे करने जा रही है। हालांकि विपक्ष ने कहा था कि यह सरकार 11 दिन भी नहीं चल पाएगी। शिवसेना ने कोश्यारी को एक संत-महात्मा करार देते हुए कहा कि विश्वास नहीं किया जा सकता कि कोई भी संत-महात्मा राजनीतिक षड्यंत्र में शामिल हो सकता है। पार्टी ने कहा कि कोश्यारी ने अपना पूरा जीवन आरएसएस के विचारों का पालन करने में बिता दिया। 

संपादकीय में कहा गया है कि भाजपा नेताओं के अलावा राकांपा प्रमुख शरद पवार, पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल और शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने राज्यपाल से मुलाकात की है। पवार, पटेल और राउत की राज्यपाल से मुलाकात की ओर इशारा करते हुए शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र के ताजा हालात पर चर्चा करने का यह मतलब नहीं है कि राजभवन में ''कुछ चल रहा है।'' 

पार्टी ने कहा कि ठाकरे सरकार स्थिर है...फिर भी लोग अफवाहें उड़ा रहे हैं कि राजभवन में कुछ (सरकार की स्थिरता को लेकर) चल रहा है, और इस तरह राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं। 

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