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अगर देश के प्रधानमंत्री सरदार पटेल होते तो आज किसानों का हाल बेहतर होता : राधामोहन सिंह

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बांका : कटोरिया विधानसभा एवं प्रखंड हाई स्कूल प्रांगण में पहली बार किसान सम्मेलन सह जागरूकता कार्यक्रम किया गया। जहां हजारों किसानों ने शिरकत की। आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा अटारी जोन-3 के सहयोग से आयोजित संरक्षित किस्मों पर किसानों का अधिकार एवं लाभ में भागीदारी विषयक जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पौधा किस्म और कृषिक अधिकार संरक्षण अधिनियम- पीपीवी एंड एफआर, 2001 ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रजनकों और अनुसंधानकत्र्ताओं के बीच प्लेटफॉर्म बनाने तथा पौधों के प्रजनकों और किसानों के अधिकरों के बच संतुलन स्थापित करने व बनाये रखने का कार्य किया है।

श्री सिंह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि मां मिट्टी की सेहत ठीक किये बगैर किसान समृद्ध नहीं हो सकता है। इसलिए गरीब किसान के ख्ेाता में मिट्टी की जांच कर मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड देने की योजना साढ़े चार साल से शुरू हो गयी है। देश आजादी के बाद सरदार बल्लभ पटेल देश के प्रधानमंत्री होते तो आज देश की दुर्दशा यह नहीं होती। अगर अटल जी की सरकार नहीं होती तो गांव के लोग कभी काली पक्की सडक़ देख नहीं पाते। उन्होंने कहा कि कृषि जैव विविधता के संरक्षण तािा परिरक्षण में किसानों ओर किसानों के समुदायों, योगदानों को ध्यान में रखते हुए पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण ने उक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किसानों और किसान समुदायों को आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों तथा उनके वन्य संबंधियों के अनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, सुधार और परिरक्षण में किये गये प्रयासों के लिए मान्यता प्रदान की गयी और उन्हें सम्मानित किया है। अब तक इस प्राधिकरण ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों से 124 किसानों के समुदायों एवं किसानों को इस योगदान के लिए पुरस्कृत किया है।

श्री सिंह ने बताया कि सरकार ने मई 2016 में भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बौद्धिक सम्पदा की क्षमता को प्रेरित करने हेतु राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार आईपीआर नीति घोषित की। जिसके द्वारा जन सामान्य के हितों की रक्षा करते हुए समय बीज बाजार की भी वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में इस प्राधिकरण ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से सामुदायिक बीज बंैकों की स्थापना करके गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री उपलब्ध कराते हुए परंपरागत किस्मों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में प्राधिकरण ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है। विगत 10 वर्षों में 156 फसल प्रजातियां भारत सरकार द्वारा पंजीकरण हेतु अधिसूचित की गयी है। इस अवसर पर मंत्री रामनारायण मंडल, श्रीमती पुतुल कुमारी, डा. निकी हेम्ब्रम, जनार्दन मांझी इत्यादि शामिल थे।