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संप्रग के दूसरे कार्यकाल में नीतिगत पंगुता के लिए जयराम रमेश भी जिम्मेदार : वीरप्पा मोइली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की एक टिप्पणी पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने बुधवार को आरोप लगाया कि संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल में ‘नीतिगत पंगुता’ के लिए जिम्मेदार लोगों में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री रमेश भी शामिल थे। 

मोइली ने पार्टी के एक अन्य नेता शशि थरूर पर भी उनके इस बयान के लिए नाराजगी जाहिर की कि सही चीज करने पर प्रधानमंत्री की सराहना करने से विपक्ष की आलोचना की भी साख बनेगी। मोइली ने दोनों नेताओं के बयानों को ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए कांग्रेस नेतृत्व द्वारा उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। 

उन्होंने पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘हमारी सरकार (संप्रग-2) में नीतिगत पंगुता के लिए वह (रमेश) जिम्मेदार थे और वह कई बार शासन के सिद्धांतों के साथ समझौता करने के लिए भी जिम्मेदार थे।’’ मोइली ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि रमेश नीतिगत पंगुता के लिए जिम्मेदार लोगों में शामिल हैं और वह अकेले इसके लिए जिम्मेदार नहीं थे। 

मोइली ने आरोप लगाया, ‘‘रमेश पर्यावरण मंत्री थे। वह ग्रामीण विकास और इस तरह भूमि अधिग्रहण के मामले में भी प्रभारी मंत्री थे। जमीन अधिग्रहण करने वाले उद्योगों के लिए बड़ी कठिनाइयां पैदा की गयीं।’’ उन्होंने कहा कि जब वह पर्यावरण मंत्री थे, तब सबकुछ नकारात्मक था। परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी देने के लिए कोई तंत्र नहीं बनाया गया। 

गौरतलब है कि रमेश ने गत बुधवार एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के शासन का मॉडल 'पूरी तरह नकारात्मक गाथा' नहीं है और उनके काम के महत्व को स्वीकार नहीं करके और हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करके कुछ हासिल नहीं होने वाला है। 

मोइली ने इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, ‘‘क्या कांग्रेस (मोदी को) खलनायक की तरह पेश कर रही है।’’ उन्होंने रमेश के बयान को ‘‘बहुत अशोभनीय’’ बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान देकर वह भाजपा के साथ समझौता कर रहे हैं। 

मोइली ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘कोई नेता जो इस तरह का बयान देता हो, मुझे लगता है कि वह कांग्रेस पार्टी या उसके नेतृत्व के लिए काम नहीं कर रहा। मंत्री होने के नाते ‘वे’ अधिकारों का उपयोग करते हैं और विपक्ष में आ कर वह सत्ताधारी दल के साथ एक संपर्क बनाए रखेंगे।’’ 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दावा कि थरूर को कभी भी परिपक्व राजनीतिज्ञ नहीं समझा गया। उन्होंने कहा ‘‘वह (थरूर) अक्सर बयानबाजी करते हैं और प्रेस में जगह पाते हैं।’’ उन्होंने कहा ‘‘मैं नहीं समझता के उनके बयान को गंभीरता से लिया जा सकता है। उन्हें गंभीर राजनीतिज्ञ बनना होगा। यह हमारी अपील है।’’ 

मोइली ने कहा ‘‘मेरे विचार से कांग्रेस पार्टी के लिए यह समय समुचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और ऐसे लोगों को आगाह करने का है जो (कांग्रेस पार्टी को) छोड़कर जाना चाहते हैं। उन्हें सीधे-सीधे जाने दिया जाए, वे पार्टी में रह कर, पार्टी के साथ और उसकी विचारधारा के साथ कोई छेड़छाड़ न करें।’’ 

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री मोइली ने जोर दे कर कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्तर पर और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व के लिए पार्टी को पुनर्जीवित करने की खातिर तत्काल कदम उठाना जरूरी है। इसका कोई विकल्प नहीं है। 

उन्होंने कहा ‘‘हमें (यह कदम उठाने में) सिर्फ इसलिए देर नहीं करनी चाहिए कि दो या तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।’’ 

मोइली ने कहा कि हर बार चुनाव का बहाना बन जाता है। पार्टी को ऐसे लोगों को पूरी मजबूती के साथ संगठित करना चाहिए जो कांग्रेस के मूल्यों को महत्व देते हैं और जनता की नब्ज समझते हैं। उन्होंने कहा ‘‘हमें यह करना होगा। पार्टी के लोगों को पहले ही लग रहा है कि इसके लिए यह सही समय है क्योंकि ऐसा न करने पर भाजपा के हौसले हमारे काडर को परेशान करने के लिए बुलंद होंगे। सरकार में बैठे लोगों को...भाजपा को कांग्रेस पार्टी की ओर सम्मान तथा डर की नजरों से देखना होगा, अन्यथा पूरे विपक्ष के लिए उनके मन में भय का कोई भाव नहीं होगा।’