आदिवासियों के सामाजिक संगठन ‘जय आदिवासी युवा शक्ति’ (जयस) ने कांग्रेस से मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से आदिवासी बहुल इलाके की चार सीटें जयस के नेताओं के लिए छोड़ने की मांग करते हुए कहा है कि ऐसा न होने पर वह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित प्रदेश की सभी छह सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगा। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या वर्ष 2011 में हुए जनगणना के अनुसार 1,53,16,784 है, जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का 21.1 प्रतिशत है।

जयस के राष्ट्रीय संरक्षक एवं कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने ‘भाषा’ को बताया, ‘‘मैंने 14 मार्च को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात कर उनसे मांग की है कि जयस को मध्य प्रदेश की चार लोकसभा सीटें… धार, रतलाम-झाबुआ, खरगौन एवं बैतूल दे दें।’’ उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस से सहमति मिल जाती है, तो इन चार सीटों पर जयस युवाओं को चुनावी मैदान में उतारेगा। हालांकि, वे सभी कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजे पर ही चुनाव लड़ेंगे। अलावा ने बताया, ‘‘जयस राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं है।

इसलिए राजनीतिक दलों से जयस के नेताओं के लिए सीटें मांगना और उनके ही चुनाव चिन्ह पर लड़ना हमारी मजबूरी है।’’ दिल्ली स्थित एम्स में सहायक प्रोफेसर रह चुके अलावा ने कहा कि मांगी गई चार सीटें न दिए जाने पर जयस मध्य प्रदेश की छह सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगा। छह सीटों में उसकी मांगी गई चार सीटों के अलावा महाकौशल क्षेत्र की शहडोल एवं मंडला सीटें भी शामिल होंगी। ये छह सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इन सभी छह सीटों पर भाजपा जीती थी। जयस के संस्थापक अलावा ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं किसी भी सीट से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। मांग पूरी न होने पर जयस क्या कांग्रेस का साथ छोड़ देगा ? इस पर अलावा ने कहा कि वह परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाएंगे।

अलावा ने बताया कि पिछले साल नवंबर में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जयस नेताओं को मालवा-निमाड़ की सात विधानसभा सीटों पर टिकट देने की बात की थी, ‘‘लेकिन केवल मुझे ही टिकट दिया। तब मैंने कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजे पर धार जिले की मनावर सीट से चुनाव लड़ा और विधायक चुना गया।’’ वर्तमान में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 26 भाजपा के पास और 3 कांग्रेस के पास हैं।