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झारखंड तक पहुंची बिहार की सियासत, RJD और JDU में शुरू हुई संगठन मजबूत करने की कवायद

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल जनता दल (युनाइटेड) और मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अब पड़ोसी राज्य झारखंड पर अपनी नजर गडा दी है। दोनों पार्टियां झारखंड में अपने पांव मजबूत करने में जुटे हैं, जिसके लिए दोनों ने कवायद तेज कर दी है। राजद के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जहां 18 सितंबर को दो दिवसीय झारखंड की यात्रा पर रांची जाने वाले हैं वहीं जदयू ने भी अपने संगठन को झारखंड में मजबूत करने को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।

पिछले झारखंड विधानसभा चुनाव में जदयू अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी और तत्कालीन अध्यक्ष आर सी पी सिंह ने काफी पसीना भी बहाया था, लेकिन पार्टी एक भी सीट पर जीत नहीं दर्ज कर सकी थी। जदयू एकबार फिर झारखंड में अपने संगठन को धार देने में जुटी है। जदयू ने लक्ष्य रखा है कि अगले दो साल में पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना है। जदयू के एक नेता बताते हैं कि झारखंड में संगठन को मजबूत करने और पार्टी की कमान किसी नए नेता को सौंपे जाने को लेकर सोमवार को नई दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई है।

इस बैठक के बाद तय है कि एक-दो दिनों में झारखंड में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। इस बैठक में सांसद और पार्टी के अध्यक्ष ललन सिंह भी मौजूद थे। इधर, जदयू के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा कहते हैं कि जदयू को झारखंड में ही नहीं राष्ट्रीय पार्टी बनाने को लेकर संगठन को विस्तार करने को लेकर लगातार कार्य किए जा रहे हैें। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी अपने विस्तार को लेकर प्रयास करती है जदयू भी इसमें लगी है। इधर, राजद भी अब झारखंड में अपनी जडें मजबूत करने में जुट गई है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस सिलसिले में अपनी दो दिवसीय झारखंड यात्रा पर 18 सितंबर को रांची पहुंचेंगे।

इस दौरान वे प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने पर पार्टी नेताओं से बातचीत भी करेंगे। तेजस्वी 19 सितंबर को पार्टी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह कहते हैं कि इस मौके पर 10 लाख लोगों को सदस्य बनाने की लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि राजधानी रांची में तेजस्वी यादव का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में राजद का प्रदर्शन झारखंड में उम्मीद के अनुसार नहीं रहा था। 

इसके बाद से ही राजद पड़ोसी राज्य में अपनी जड़ों को मजबूत करने की कवायद में जुटा है। पिछले विधानसभा चुनाव में राजद, कांग्रेस और झामुमो के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरा था, जिसमें उसे एक सीट पर सफलता हाथ लगी थी। राजद के एकमात्र विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। बहरहाल, बिहार में अपनी गहरी जडें जमा चुके दोनों दल पड़ोसी राज्य झारखंड में अपनी खोई जमीन तलाश करने को लेकर कवायद प्रारंभ कर दी है, लेकिन अब देखने वाली बात होगी कि वहां इन दोनों दलों को कितना समर्थन मिलता है।