पटना : आजादी के 70 साल बाद बिहार में पहली बार हिन्दी भाषा का गठन किया गया। भाषा गठन के बाद बिहार ने हिन्दी भाषा पर सरकारी पदाधिकारी एवं छात्र-छात्राओं के बीच वाद-विवाद रखा जाता है। जिससे हिन्दी के प्रति लोगों की रूची बढ़ गयी है। पहली बार बिहार में न्यायाधीशों ने गरीब-गुरबा को न्याय मातृभाषा हिन्दी में दिया। मंत्रिमंडल राजभाषा द्वारा सूबे के तीन न्यायाधीश को सम्मानित किया गया था। इसकी जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय-राजभाषा विभाग के निदेशक इम्तियाज अहमद करीमी ने सूचना भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दी।

उन्होंने बिहार के सभी न्यायाधीशों से विनती किया कि गरीब-गुरबा को हिन्दी में न्याय देंगे तो न्यायाधीश सम्मानित होंगे। बिहार में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर दो दिवसीय हिन्दी समागम मनाया जायेगा। जिसमें देश के हिन्दीभाषी क्षेत्र के साहित्यकार एवं विद्वान भाग लेंगे। हिन्दी सेवा सम्मान पुरस्कार के रूप में डा. राजेन्द्र प्रसाद शिखर सम्मान तीन लाख रुपया, बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर पुरस्कार 2.50 लाख रुपया, कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार 2 लाख रुपया, बीपी मंडल पुरस्कार 2 लाख रुपया, नागार्जुन पुरस्कार 2 लाख रुपया, राष्ट्रकवि दिनकर पुरस्कार 2 लाख रुपया, फणीश्वर नाथ रेण पुरस्कार 2 लाख रुपया, महादेवी वर्मा पुरस्कार 50 हजार रुपया, बाबू गंगा शरण सिंह पुरस्कार 50 हजार रुपया, विद्याकर कवि पुरस्कार 50 हजार रुपया, विद्यापति पुरस्कार 50 हजार रुपया, मोहन लाल महतो वियोगी पुरस्कार 50 हजार रुपया, भिखारी ठाकुर पुरस्कार 50 हजार रुपया, डा. ग्रियर्सन पुरस्कार 50 हजार रुपया, डा. फादर कामिल बुल्के पुरस्कार 50 हजार रुपया दिया जायेगा।

उक्त पुरस्कार राजधानी से लेकर अनुमंडल में भी एससी-एसटी छात्रों को वाद-विवाद के माध्यम से पुरस्कार दिया जाता है। अब यह पुरस्कार अल्पसंख्यक बच्चों को भी वाद विवाद के माध्यम से दिया जायेगा। इस बार राजभाषा विभाग द्वारा डिक्सनरी भी निकाला गया है ताकि हिन्दी के जानकार अपनी बोल-चाल की भाषा में डिक्सनरी और फाइल लिख-पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि समय-समय पर राजभाषा द्वारा पत्रिका भी प्रकाशित की जाती है। जिसमें गिने-चुने लोगों का आलेख होता है, यह आलेख चयन समिति द्वारा निर्धारित की जाती है। इस बार विभाग द्वारा मातृभाषा हिन्दी के लिए प्रचार-प्रसार युद्ध स्तर पर की जा रही है। संवाददाता सम्मेलन में नूर आलम, लाल बाबू पासवान, रामबहादुर सिंह मौजूद थे।