समानता और अभिव्यक्ति की आजादी का आग्रह करते हुए एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों ने हाल ही में पारित ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक के खिलाफ अपनी आपत्तियां जताई हैं। मुंबई की रहने वाली ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता गौरी सावंत ने शनिवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘समस्या यह है कि विधेयक हमारे लिए एक परीक्षण निकाय (स्क्रीनिंग बॉडी) के बारे में बात करता है। यह हमारे लिए भीख मांगने को एक अपराध बनाता है।’ सावंत 2014 में राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) द्वारा दिए गए फैसले में याचिकाकर्ता थीं। इस समुदाय के अधिकतर लोग अपने परिवारों द्वारा त्यागे गए होते हैं।

 सावंत ने कहा, ‘यह भी नहीं है कि केवल ट्रांसजेंडर लोग ही भीख मांगते हैं।’ यहां आयोजित ‘थर्ड आई’ कार्यक्रम के दौरान हाशिए पर रहने वाले तबके के लिए कोष जुटाने के एक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में एक नीलामी आयोजित की गई और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और प्रसिद्ध हस्तियों ने रैंप वॉक किया।

पश्चिम बंगाल ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य रंजीता सिन्हा के मुताबिक, ‘कोई भी पुरुष या महिला ट्रांसजेंडर के रूप में पहचाना जाना पसंद नहीं करेगा, इसलिए स्क्रीनिंग कमेटी की कोई जरूरत नहीं है।’ अपनी कहानी साझा करते हुए सावंत ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बाद मुझे एक बच्चे को गोद लेने का अधिकार मिला क्योंकि मैं मां बनना चाहती थी। लेकिन, क्यों समाज हमें राष्ट्र के एक नागरिक के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता, जिसके बारे में संविधान बात करता है।’

बंगाल की ट्रांसजेंडर शिक्षाविद् अतरी कार ने कहा कि उन्हें छात्रों द्वारा नहीं बल्कि साथी शिक्षकों द्वारा परेशान किया गया। पश्चिम बंगाल की गृह सचिव अतरी भट्टाचार्य ने कहा, ‘योजनाओं और नीतियों से कहीं ज्यादा समुदाय के लिए सामान्य जागरूकता और सहनशीलता की जरूरत है। लोगों को संवेदनशील होने की जरूरत है।’

तमिलनाडु की ट्रांसजेंडर लेखिका, अभिनेत्री और पेंटर कल्की सुब्रमण्यम की पेंटिंग समारोह में नीलाम की गई। इससे मिली राशि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों की शिक्षा के लिए दी जाएगी। सुब्रमण्यम ने कहा, ‘मैंने एक लड़के के रूप में जन्म लिया था लेकिन मैं एक लड़की बनना चाहती थी। मैंने इस अहसास को अपनी पेंटिंग के जरिए व्यक्त किया। मैंने भारत भर में सौ से ज्यादा ट्रांसजेंडर आर्टिस्ट को प्रशिक्षण दिया है।’