रुद्रप्रयाग : नीचे से उफान पर बह रही मंदाकिनी नदी और उपर रस्सी के सहारे लटक रही जिंदगी। जी हां ये हाल कही ओर के नहीं, बल्कि विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के हैं। जहां गरूड़चटटी को जोड़ने वाला पैदल पुल मंदाकिनी नदी के तेज बहाव में डूब गया है और नदी पार फंसे मजदूर जान जोखिम में डालकर रस्सी के सहारे मंदाकिनी नदी को पार करने पर मजबूर हैं। इतना ही नहीं कल से मजदूरों को रस्सी के सहारे ही भोजन और पानी भी भेजा जा रहा है।

केदारनाथ धाम में 16-17 जून वर्ष 2013 की आपदा जैसे हालात ताजा हो गये हैं। पिछले दो दिनों से केदारनाथ धाम में मंदाकिनी नदी विकराल रूप लेकर बह रही है। जिस कारण केदारनाथ धाम में हालात अस्त-व्यस्त हो गये हैं। केदारनाथ धाम के गरुड़चटटी में इन दिनों पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। कई मजदूर गरुड़चटटी में पुनर्निर्माण कार्य करने में लगे हैं। भारी बारिश के कारण गरुड़चटटी को जोड़ने वाला पैदल पुल मंदाकिनी नदी के उफान में क्षतिग्रस्त होने के साथ ही डूब गया है। जिस कारण मजदूर नदी के उस पार ही फंस गये हैं।

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मजदूरों के सम्मुख अब खाने का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में अब मजदूर उफान पर आई मंदाकिनी नदी को रस्सी के सहारे जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं। इसके साथ ही रस्सी के सहारे केदारनाथ धाम में मजदूरों के लिये खाना भी पहुंचाया जा रहा है। नदी के उस पार कई मजदूर एवं साधु संत फंसे हैं। केदारनाथ में गरूड़चट्टी को जाने वाले पैदल पुल के मंदाकिनी नदी में डूब जाने से दूसरी ओर राहत सामग्री पहुंचाने में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की लड़कियां सबसे आगे हैं।

रस्सी के सहारे उफनदी मंदाकिनी के उपर से गरुड़चट्टी की और राहत सामग्री पहुंचाने का काम लड़कियां कर रही है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। बिना किसी डर और खौफ के ये लड़कियां आसानी से रस्सी के सहारे नदी को पार कर रही हैं। केदारनाथ पुलिस चौकी इंचार्ज बिपिन चन्द्र पाठक ने बताया कि केदारनाथ में हालात सामान्य हैं। बारिश और नदी का जल स्तर कम हो गया है। नदी पार फंसे मजदूरों को रस्सी के सहारे खाना भेजा जा रहा है। प्रत्येक गतिविधि पर नजर है।