हाल ही में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 22 सीटों पर प्रत्याशियों के बीच जीत-हार के अंतर से अधिक मत नोटा को मिले हैं। इन 22 सीटों में से 12 पर कांग्रेस विजयी रही जबकि नौ पर बीजेपी एवं एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा। नोटा से कम अंतर से जीतने वाले इन नौ बीजेपी प्रत्याशियों ने कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराया जबकि कांग्रेस के इन 12 उम्मीदवारों ने बीजेपी के उम्मीदवारों को मात दी।

निर्दलीय उम्मीदवार ठाकुर सुरेन्द्र सिंह नवल ने प्रदेश की मंत्री अर्चना चिटनिस (बीजेपी) को बुरहानपुर सीट से 5,120 मतों से हराया था, जबकि नोटा पर 5,726 मत पड़े थे। इस प्रकार नोटा के कम अंतर से बीजेपी 13 सीटों पर हारी जबकि कांग्रेस नौ सीटों पर हारी। चिटनिस सहित बीजेपी के चार मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर नोटा में पड़े मतों से कम अंतर से हारे। नोटा से कम अंतर से हारने वाले तीन अन्य मंत्री जयंत मलैया, शरद जैन एवं नारायण कुशवाहा हैं।

मलैया दमोह सीट से 798 मतों से हारे जबकि वहां नोटा को 1,299 मत मिले। जैन जबलपुर उत्तर सीट से 578 मतों से हारे जहां नोटा को 1,209 वोट मिले। कुशवाहा ग्वालियर दक्षिण सीट से मात्र 121 मतों से हारे और वहां पर 1,550 वोट नोटा को मिले। इन चार मंत्रियों के अलावा, बीजेपी के नौ उम्मीदवार जौबट, सुवासरा, राजपुर, राजनगर, गुन्नौर, नेपानगर, ब्यावरा, पेटलावद एवं मानधाता सीटों पर भी नोटा के कम अंतर से हारे।

कांग्रेस ने आठ प्रत्याशी टिमरनी, इंदौर-5, चांदला, बांधवगढ़, नागौद, जावरा, कोलारस, बीना एवं गरौठ सीटों से नोटा से कम वोटों से हारे। चुनाव आयोग की वेबसाइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को हुए मतदान में 5,42,295 मतदाताओं ने ईवीएम मशीनों में नोटा का बटन दबाया जो कुल मतदान का 1.4 प्रतिशत है। हालांकि, इस बार मतदाताओं ने वर्ष 2013 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव की अपेक्षा नोटा का उपयोग कम किया।

वर्ष 2013 में नोटा को 6,43,171 मत मिले थे जो कुल मतदान का 1.90 प्रतिशत था। वोट प्रतिशत के मामले में नोटा पांचवें स्थान पर रहा। बीजेपी को 41 प्रतिशत, कांग्रेस को 40.9 प्रतिशत, बहुजन समाजवादी पार्टी को पांच प्रतिशत एवं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 1.8 प्रतिशत मिले। सपा एवं आम आदमी पार्टी (आप) का वोट प्रतिशत नोटा से भी कम रहा। सपा को मात्र 1.3 प्रतिशत मत मिले जबकि आप को 0.7 प्रतिशत मत मिले।