केन्द्रीय अपर सचिव प्रशासनिक सुधार एवं जनअभाव निराकरण वी श्रीनिवास ने लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए साख प्रवाह बढ़ने की जरुरत बताते हुए कहा है कि वित्तदायी संस्थाओं को तय समय सीमा में ऋण सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। श्री श्रीनिवास आज यहां केंद्र सरकार के सौ दिवसीय अभियान के तहत जयपुर एवं सीकर जिले में एमएसएमई इको सिस्टम सुदृढ़करण पर आयोजित बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एमएसएमई इकाइयां ही देश में सर्वाधिक रोजगार के अवसर सृजित करती है।

उन्होंने सभी उद्यमों से बीमा योजना से कार्मिकों को बीमित करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि सरकार की रोजगार सृजन, एमएसएमई उद्यमों के लिए ऋण योजनाओं, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, अनुदान योजनाओं से अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर लाभान्वित किया जाए। उन्होंने कहा कि बीमा के साथ ही युवाओं के कौशल विकास पर बल दिया जा रहा है।

 उन्होंने बताया कि एमएसएमई के 59 मिनट में ऋण योजना में जयपुर और सीकर में करीब 500 उद्यमियों को ऋण स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने जयपुर के बगरु के टैक्सटाइल पार्क के कार्यों की सराहना की और प्रदेश में उद्योग विभाग द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन और संचालन पर संतोष व्यक्त किया।

उन्होंने जयपुर एवं सीकर जिला कलक्टरों को विभागीय अधिकारियों, संस्थाओं, जिलों के औद्योगिक संघों एवं लीड बैंकों के साथ बैठककर ऋण उपलब्धता में आ रही बाधाओं के निस्तारण के निर्देश दिए। आयुक्त उद्योग डॉ। कृष्णाकांत पाठक ने बताया कि राज्य में सात लाख 31 हजार एमएसएमई इकाइयों में 63823 करोड़ विनियोजित है। उन्होंने बताया कि इस सेक्टर से 34 लाख 48 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जयपुर जिले में ही एक लाख 19 हजार एमएसएमई उद्यम है जिनमें सर्वाधिक 32 हजार उद्यम हैण्डीक्राफ्ट सेक्टर से जुड़ हुए हैं।