कोझिकोड: केरल के कोझीकोड में रहस्मय बीमारी ने लोगों में दहशत फैला रखी है।जिससे अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। ‘निपाह’ नामक यह विषाणु  तेजी से पांव फैला रहा है। इससे पहले रविवार (20 मई) को केरल के कोझिकोड जिले में पिछले दो हफ्ते में कथित रुप से ‘निपाह’ नामक एक विषाणु से एक ही परिवार के तीन व्यक्तियों और दो अन्य की मौत के बाद राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल सावधान हो गया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. के. श्याला ने स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, ‘‘जिस विषाणु से यह बीमारी पैदा की, उसका प्रकार अबतक पता नहीं चला है। खून और अन्य नमूने पुणे के राष्ट्रीय विषाणु संस्थान भेजे गये हैं। कुछ दिनों में परिणाम उपलब्ध होगा।’’

वायरस पीड़िता नर्स की मौत

रविवार (20 मई) को इस वायरस से पीड़िता नर्स की मौत हो गई, जो कि तालुक अस्पताल में काम करती थी। रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती मरीजों के संपर्क में आने के बाद नर्स भी उसकी शिकार हो गई। इस बात की आशंका से कि कहीं इस वायरस का असर और न बढ़े, नर्स के मृत शरीर को उसके परिवार को ना सौंपते हुए तुरंत ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोझिकोड के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय एक विशेष कार्यबल बनाया गया है। स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. आर. एल. सरिता ने इस बैठक के बाद विशेष कार्यबल के गठन का फैसला किया. किसी भी आकस्मिक स्थिति से निबटने के लिए आपात उपचार की निगरानी के लिए एकल खिड़की व्यवस्था की गयी है।

शनिवार (19 मई) को जिले में एक निजी अस्पताल में 50 वर्षीय महिला की मौत हो गयी थी, जबकि उसके 25 और 23 साल के दो रिश्तेदारों की क्रमश: 18 और 5 मई को मृत्यु हो गयी थी। इससे पहले लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने केरल के कोझिकोड जिले में एक विषाणु के प्रकोप को रोकने के लिए केंद्र की मदद मांगी थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में रामचंद्रन ने कहा कि उनके लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वताकरा में कुट्टियाडी तथा पेरम्ब्रा सहित कुछ पंचायत क्षेत्र ‘घातक विषाणु’ की चपेट में हैं। सांसद ने पत्र की एक प्रति यहां प्रेस को भी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि कुछ चिकित्सकों ने इसे निपाह नामक विषाणु बताया है, जबकि अन्य ने इसे जूनोटकि विषाणु बताया है जो तेजी से फैलता है।

इस बीच, दिल्ली से प्राप्त खबर के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने रविवार (20 मई) को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक को राज्य सरकार की सहायता करने के लिए केरल के कोझिकोड़ की यात्रा करने का निर्देश दिया। मंत्री के निर्देश पर एक केंद्रीय टीम केरल जाएगी। नड्डा ने ट्वीट कर कहा कि उन्होंने स्थिति की समीक्षा की।

क्‍या होता है निफा वायरस (NiV)? कैसे फैलता है?
निफा वायरस, मनुष्‍यों और जानवरों में फैलने वाला एक गंभीर इंफेक्‍शन है। यह वायरस एन्सेफलाइटिस का कारण बनता है। निफा वायरस, हेंड्रा वायरस से संबंधित है, जो घोड़ों और मनुष्यों के वायरल सांस संक्रमण से संबन्‍धित होता है। यह इंफेक्‍शन फ्रूट बैट्स के जरिए लोगों में फैलता है। खजूर की खेती करने वाले लोग इस इंफेक्‍शन की चपेट में जल्‍दी आते हैं। 2004 में इस वायरस की वजह से बांग्लादेश में काफी लोग प्रभावित हुए थे।

निफा वायरस (NiV) के लक्षण?
मनुष्‍यों में निफा वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है। बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत होना, इसके लक्षणों में शामिल हैं। 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है। कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है।

निफा वायरस का इलाज?
मनुष्यों में, निफा वायरस ठीक करने का एक मात्र तरीका है सही देखभाल। रिबावायरिन नामक दवाई वायरस के खिलाफ प्रभावी साबित हुई है। हालांकि, रिबावायरिन की नैदानिक प्रभावकारिता मानव परीक्षणों में आज तक अनिश्चित है। दुर्भाग्यवश, मनुष्यों या जानवरों के लिए कोई विशिष्ट एनआईवी उपचार या टीका नहीं है।

निफा वायरस के इंफेक्‍शन से कैसे बचें?
यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसे रोकने के लिये संक्रमित रोगी से दूरी बनाए रखें। स्वास्थ्य कर्मियों को अस्पताल में निफा वायरस से बचने के लिए संक्रमित मरीजों की देखभाल करते समय या प्रयोगशाला के नमूनों को संभालने और जमा करते समय उचित सावधानी बरतनी चाहिये। यही नहीं बीमार सूअरों और चमगादड़ों के संपर्क में आने से बचें।

 

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