भागलपुर : पारद शम्भू बीज है। यानी पारद की उत्पत्ति देवाधिदेव महादेव के वीर्य से हुई मानी गई है। इस संबंध में राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पं. आर. के. चौधरी बाबा.भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रोंक्त मतानुसार बतलाया कि पारद शिव लिंग को साक्षात शिव माना गया हैए इसलिए पारद शिव लिंग का पूजन करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

शुद्ध पारद संस्कार द्वारा बंधन करके बनाया जाता है। वह स्वयं सिद्ध है। वाणभट्ट के मतानुसार, जो पारद शिव लिंग का भक्ति सहित पूजन करता है उसे तीनों लोक में स्थित शिव लिंगो के पूजन का फल प्राप्त होता है। पारद शिव लिंग का दर्शन करने से उत्कृष्ट फलों की प्राप्ति होती है। इसके दर्शन से सैकड़ों अश्वमेघ यज्ञों के बराबर पुण्य अर्जित होता है तथा करोड़ों गोदान करने एवं हजारों स्वर्ण मुद्रा के दान करने के बराबर फल मिलता है।

जिस घर में पारद शिव लिंग का नियमित पूजन होता है वहां सभी प्रकार के लौकिक और पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है। किसी भी प्रकार की कमी उस घर में नहीं होती क्योंकि वहां रिद्धि-सिद्धि और मां महालक्ष्मी का वास होता है। साक्षात भगवान शिव वहां बिराजते हैं। इसलिए समस्त दोष व विपदा समाप्त हो जाते हैं। अगर नियमित रूप से प्रत्येक सोमवार को पारद शिव लिंग पर अभिषेक किया जाय तो बुरी से बुरी शक्तियों का भी प्रभाव नष्ट हो जाता है। इसलिए जीवन में पारद शिव लिंग का पूजन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं।