तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी कर रहे कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री ई एम सुदर्शन नचियप्पन ने यह सीट कार्ति पी चिदंबरम को आवंटित करने के पार्टी आलाकमान के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि लोग इस परिवार से ‘नफरत’ करते हैं। शुक्रवार को तमिलनाडु से आठ कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई थी, लेकिन शिवगंगा सीट के लिए कार्ति के नाम की घोषणा रविवार शाम को की गई। कार्ति के अलावा सिर्फ नचियप्पन ही शिवगंगा सीट के लिए दावेदार थे।

 साल 1999 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के एच राजा और तमिल मानिल कांग्रेस के पी. चिदंबरम (जो तीसरे पायदान पर रहे थे) को हराकर जीत हासिल करने वाले नचियप्पन ने कहा कि आलाकमान के फैसले ने कांग्रेस को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि कार्ति ‘‘अदालती मुकदमों’’ का सामना कर रहे हैं।

 पी. चिदंबरम शिवगंगा लोकसभा सीट पर सात बार जीत हासिल कर चुके हैं। इस सीट पर वह 1984 में पहली बार जीते थे। साल 2004 और 2010 में राज्यसभा के लिए चुने गए नचियप्पन ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जहां तक मैं समझता हूं, लोग उस परिवार (पी. चिदंबरम के परिवार) से नफरत करते हैं, क्योंकि उन्होंने शिवगंगा क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया।’’ पेशे से वकील नचियप्पन ने कहा कि कार्ति को उम्मीदवार बनाने से भविष्य में पार्टी को मुश्किलें पेश आ सकती हैं।

 केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री रह चुके नचियप्पन ने आरोप लगाया कि चिदंबरम ने न केवल उन्हें तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनने से रोका बल्कि करीब नौ साल तक (साल 2004 में यूपीए के केंद्र में सत्तासीन होने के बाद) मंत्री बनने से भी रोका। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी उन्हें किसी पद की पेशकश की जाती थी तो चिदंबरम इसका विरोध किया करते थे। कार्ति चिदंबरम ने कहा, ‘‘मेरे खिलाफ किसी भी अदालत में कोई मामला नहीं है।

मेरे खिलाफ सिर्फ बेबुनियाद आरोप हैं।’’ सोमवार को शिवगंगा में पत्रकारों से बातचीत में कार्ति ने अपने और अपने पिता के खिलाफ नचियप्पन की टिप्पणी पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के एस अलागिरि ने कहा कि एक बार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने फैसला कर लिया तो इसे स्वीकार करना ही सही रहेगा और इसका विरोध करना नचियप्पन जैसे नेता को शोभा नहीं देता। अलागिरि ने कहा, ‘‘यदि उन्हें कोई शिकायत है तो वह इस बारे में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से सीधी बातचीत कर सकते हैं।’’