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मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियों द्वारा घाटा दिखाकर दाम बढ़ाने की तैयारी

जबलपुर : मध्यप्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक सेहत बिगड़ती जा रही है। लगातार बढ़ रहे खर्च और वसूली कमजोर होने की वजह से घाटा भी साल दर साल बढ़ रहा है। बीते चार साल में ही बिजली कंपनी 24,888 हजार करोड़ के घाटे पर पहुंच चुकी है। कंपनी इस घाटे की वसूली करना चाह रही है जिसके लिए मप्र विद्युत नियामक आयोग में अर्जियां लगाई हुई हैं। अब आयोग को तय करना है कितनी राशि वसूलने की मंजूरी दी जाए। 

ये पक्का है कि यदि वसूली हुई तो असर प्रदेश के उपभोक्ताओं पर सीधा होगा। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से वित्तीय वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के बाद चौथी याचिका भी दाखिल की गई है। उक्त चारों साल का घाटा 24,888 हजार करोड़ रुपए है। इसमें प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनी का घाटा शामिल है।

 दरअसल, कंपनी प्रस्तावित आकलन के बाद अंतिम आय-व्यय का ब्योरा तैयार करती है। इसमें नुकसान होने पर कंपनी आगामी सालों में इसकी भरपाई के लिए आयोग के पास याचिका दायर करती है। आयोग सुनवाई के दौरान कंपनी के व्यय और विभिन्न् परिस्थितियों को देखते हुए फैसला करता है। कई बार मांगी गई राशि का कुछ अंश ही घाटे में मान्य करते हुए इसे वसूलने की इजाजत दी जाती है। 

वित्तीय वर्ष 2014-15 में बिजली कंपनी को करीब 5156.88 करोड़ रुपए की हानि हुई है। वहीं 2015-16 में हानि 7156.94 करोड़ पहुंच गई। वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 में बिजली से हानि 7247.55 करोड़ तथा 2017-18 में लगाई गई याचिका में 5327.54 करोड़ का घाटा बताया गया है।

जनता पर क्या असर : बिजली कंपनी अपने घाटे की भरपाई उपभोक्ता से करती है। इसके लिए बिजली के दाम में बढ़ोतरी एक विकल्प है। चाहे तो सरकार भी वित्तीय घाटे की भरपाई अपने स्तर पर कर सकती है। कंपनी को घाटे की भरपाई नहीं हुई तो उसे वितरण का काम करना मुश्किल होगा। ऐसे में आयोग को भी घाटे के संदर्भ में फैसला करना होगा।

 बिजली कंपनियां हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपए की बिजली उत्पादन इकाइयों को बांट रही हैं। जबकि उनसे बहुत कम बिजली ली जा रही है। ये सारा खेल कमीशन के लिए होता है, जो भी घाटे की पिटीशन बिजली कंपनी ने लगा रही है, वो सभी अधिनियम में उल्लेखित समय के बाद जमा की गई है इसलिए निरस्त करने योग्य है।