लोक जनशक्ति पार्टी (लाजपा) के सांसद चिराग पासवान ने एकबार फिर राम मंदिर को चुनावी मुद्दा मानने से इनकार करते हुए कहा कि चुनाव में विकास ही मुद्दा होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर अदालत का जो फैसला होगा, हम सब को स्वीकार होगा।’ उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण से समाज में अमीर और गरीब के बीच खाई पाटने में मदद मिलेगी।

उन्होंने राम मंदिर विवाद की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं वह इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार करेंगे और अध्यादेश नहीं लाएंगे। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने चुनाव के समय राम मंदिर का मुद्दा उठाया है, जिसकी लोजपा ने आलोचना भी की थी।

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पटना में एक कार्यक्रम में लोजपा के प्रमुख रामविलास पासवान को ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहे जाने के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल पर जमुई के सांसद चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी चुनावों से पहले ही किसी पार्टी के साथ गठबंधन करती है, ना कि चुनाव के बाद। उन्होंने कहा, ‘अटल जी की सरकार के साथ भी लोजपा ने चुनाव से पहले गठबंधन किया था और 2000 में कांग्रेस के साथ गए थे। इसके बाद 10 साल संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के साथ रहे थे। 2014 में भी चुनाव के पूर्व राजग के साथ आ गए।’

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हाजीपुर से चुनाव लड़ने के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह पार्टी तय करेगी। लोजपा के नेता ने नोटबंदी को लेकर वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र के विषय में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें अब तक उस पत्र का जवाब नहीं मिला है। उन्होंने हालांकि फिर कहा कि वे नोटबंदी के लाभ के विषय में आज भी सरकार से जानना चाहते हैं।