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शिवसेना का दावा, कहा- सरकार ने राज्यसभा में किशोर न्याय विधेयक बिना चर्चा के पारित किया

शिवसेना की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने बुधवार को दावा किया कि केंद्र सरकार ने उच्च सदन में बिना किसी चर्चा के किशोर न्याय अधिनियम के लिए संशोधनों को पारित कर दिया। चतुर्वेदी ने एक बयान में कहा कि विधेयक के संशोधनों में जिलाधिकारियों को अधिक अधिकार दिया गया है, जो बच्चों के हित में नहीं होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष की राय सुने बिना किशोर न्याय विधेयक पारित करने का केंद्र सरकार का फैसला अहंकार के अलावा और कुछ नहीं है। पारित विधेयक में संशोधन न्याय विरोधी और बच्चों के खिलाफ है।’’ शिवसेना नेता ने कहा, ‘‘यह दिखाता है कि सरकार कितनी बेशर्मी से सत्ता के केंद्रीकरण पर ध्यान देगी।’’

चतुर्वेदी ने दावा किया कि यह विधेयक अदालतों के बजाय जिलाधिकारियों (कलेक्टरों) को ‘‘किसी बच्चे के भविष्य का फैसला करने का अधिकार देता है’’ और इन अधिकारियों को आवश्यक न्यायिक हस्तक्षेप के बिना आश्रयघरों, अनुपालन, गोद लेने के संबंध में फैसला लेने का एकमात्र और व्यापक प्राधिकरण बनाता है।

विपक्षी दलों ने पेगासस स्पाइवेयर विवाद को लेकर बुधवार को भी अपना विरोध जारी रखा, इस बीच उच्च सदन में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 को मंजूरी दे दी गई। विधेयक में बाल देखभाल और गोद लेने से संबंधित मुद्दों पर जिलाधिकारियों और अतिरिक्त जिलाधिकारियों की भूमिका बढ़ाते हुए किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में संशोधन का प्रावधान है।