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कांवड़ यात्रा पर यूपी-उत्तराखंड सरकार में विरोधाभास की स्थिति, कोरोना के चलते योगी और धामी ने लिया यह फैसला

कांवड़ यात्रा पिछले काफी दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। देश में भले ही कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन क्या देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं को नकारते हुए कांवड़ यात्रा को अनुमति दी जानी चाहिए या फिर नहीं। इस गंभीर मुद्दे पर काफी विचार-विमर्श के बाद आखिरकार फैसला ले लिया गया है। 

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए इस साल होने वाली कांवड़ यात्रा को रद कर दिया है। हालांकि, सरकार पहले भी यात्रा को रद्द करने का संकेत दे चुकी थी। कांवड यात्रा में उत्तराखंड मुख्य रूप से मेजबान राज्य की भूमिका निभाता है, जबकि यात्री मुख्य रूप से यूपी, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान जैसे राज्यों से आते हैं। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को शर्तों के साथ अनुमति मिल चुकी हैं। 

पिछले दिनों सीएम पुष्कर धामी पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कांवड़ यात्रा के संबंध में चर्चा की थी। राज्य सरकार की ओर से यात्रा के रद्द होने के संकेत मिलने के बाद कांवड पटरी मार्ग पर बिजली, पानी, शौचालय और साफ सफाई के काम भी नहीं कराए गए थे। इसके साथ ही यात्रा के लिए अलग से बजट भी जारी नहीं किया है। हरिद्वार के बाजार में भी कांवड यात्रा को लेकर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही थी।

यूपी-उत्तराखंड सीमा पर हो सकती है भारी परेशानी- 

कांवड़ पर दोनों राज्यों का अलग- अलग रुख होने के कारण यूपी- उत्तराखंड बॉर्डर पर टकराव के हालात भी पैदा हो सकते हैं। पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि यदि यूपी की तरफ से यात्रियों की भीड़ बॉर्डर पर आई तो उन्हें थामना नामुमकिन होगा। यहां तक की आरटीपीसीआर जांच, प्री रजिस्ट्रेशन, मास्क, सोशल डिस्टेंस का पालन जैसी कवायद भी भीड़ के आगे संभव नहीं हो पाएगी। इस कारण इस विषय पर दोनों राज्यों के बीच तालमेल जरूरी है। 

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि हमारी प्राथमिकता जन स्वास्थ्य की है। हम किसी भी कीमत पर जान माल की हानि नहीं होने देंगे। भगवान भी नहीं चाहेंगे कि आस्था के नाम पर किसी का नुकसान हो। बाकी अन्य राज्यों के साथ उच्च स्तर पर भी विचार- विमर्श किया जा रहा है।