संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए) ने एक बार इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक तथा अनवरत नाइट्रोजन प्रबंधन से जुड़े भारत के दो प्रस्तावों को ग्रहण कर लिया है। पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इन प्रस्तावों को 11 मार्च से 15 मार्च तक नैरोबी में ‘पर्यावरणीय चुनौतियों एवं सतत उत्पादन तथा उपभोग के लिए अभिनव समाधान’ विषय पर आयोजित यूएनईए के चौथे सत्र में स्वीकार किया गया।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘वैश्विक नाइट्रोजन उपयोग दक्षता कम है, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन से प्रदूषण होता है। यह मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण प्रणाली सेवाओं के लिये खतरा है। इससे जलवायु परिवर्तन तथा समताप मंडल ओजोन क्षीण होती है। उन्होंने कहा, ‘दुनियाभर में पैदा की गई प्लास्टिक की कुछ मात्रा ही पुन: चक्रित की जाती है तथा इसमें से ज्यादातर प्लास्टिक पर्यावरण और जलीय जैव-विविधता को नुकसान पहुंचाती है। दोनों वैश्विक चुनौतियां हैं और भारत द्वारा यूएनईए में रखे गए प्रस्ताव इन मुद्दों के निपटने तथा वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।’