मध्यप्रदेश में 15 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सत्ता में लौटने के लिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस वर्ष अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान युवा और पिछड़े वर्ग से आने वाले अरूण यादव के स्थान पर वरिष्ठ नेता कमलनाथ को सौंप दी थी। इसके साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया था।

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अपनी राज्य की यात्राओं के दौरान राहुल गांधी ने अनेक बार संकेत दिए थे कि यह चुनाव कमलनाथ और सिंधिया के नेतृत्व में ही लड़े जा रहा है। कमलनाथ ने लगभग छह माह में कांग्रेस को पटरी पर लाने का पूरा प्रयास किया और इस कार्य में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और अन्य नेताओं ने भी पूरा सहयोग किया और शायद इसी का नतीजा है कि आज राज्य में डेढ़ दशक बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार फिर से बनी।

कांग्रेस ने चुनाव के पहले मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में किसी को पेश नहीं किया था, जबकि भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई। अब सभी के मन में एक ही सवाल है कि कांग्रेस सरकार के मुखिया के रूप में राज्य की कमान कौन संभालेगा। हालाकि इस सवाल का जवाब कमलनाथ समेत सभी वरिष्ठ नेता एक तरह से यह कहकर टालते रहे हैं कि चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष इस संबंध में फैसला लेंगे।

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राजनैतिक प्रेक्षकों का मानना है कि स्वाभाविक तौर पर मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदारों में कमलनाथ और सिंधिया ही हैं। हालाकि नतीजों के बाद सिंधिया भी कह चुके हैं कि उनके समेत सभी नेता कांग्रेस नेतृत्व का फैसला मानेंगे। हमारा लक्ष्य राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाना था और यह लक्ष्य हम पूरा करने जा रहे हैं।

वहीं सरकार बनने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कमलनाथ और सिंधिया के समर्थक कल से ही राजधानी भोपाल में सक्रिय हो गए हैं। वे अपने अपने तरीके से जश्न मना रहे हैं और आज शाम होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नए नेता के चयन को लेकर केंद्रीय पर्यवेक्षक ए के एंटोनी की मौजूदगी में चर्चा होगी और अंतिम फैसला राहुल गांधी लेंगे।