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अमरावती को राजधानी बनाने के लिए 2065 करोड़ का कर्ज देने का फैसला वर्ल्ड बैंक ने लिया वापस

आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित राजधानी अमरावती के निर्माण के लिए विश्व बैंक ने करीब 2065 करोड़ रुपए का कर्ज देने की योजना को रद्द कर दिया है। विश्व बैंक के एक अधिकारी के मुताबिक कर्ज वापस लेने का यह फैसला सरकार के प्रस्ताव वापस लेने के बाद लिया गया है। फिलहाल यह साफ़ नहीं हुआ है कि सरकार ने ऐसा कदम क्यों उठाया ? सरकार ने अभी तक इसका क्या कारण था यह भी नहीं बताया है। 

आपको बता दें कि इस प्रोजेक्ट का नाम अमरावती सस्टेनेबल कैपिटल सिटी डेवलपमेंट है। वेबसाइट के अनुसार - प्रस्तावित राजधानी के निर्माण के लिए इस परियोजना पर करीब 4923 करोड़ रुपए खर्च होना है।बता दें, वर्ल्ड बैंक इस परियोजना में करीब 2065 करोड़ रुपए देने वाली थी।इसके आलावा दूसरा सहयोगी बीजिंग में स्थित एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक 1376 करोड़ रुपए का कर्ज इस परियोजना में देने को तैयार थी। 

परियोजना पर कई संगठनों ने जताई आपत्ति

इस महत्वपूर्ण परियोजना पर राज्य के कई संगठनों ने अपनी आपत्ति जताई जिनमे पर्यावरण कार्यकर्ताओं,किसान नेताओं और सिविल सोसाइटी संगठनों ने अपनी-अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।परियोजना पर उनका कहना था कि इससे कृष्णा नदी के पानी में उफान आएगा और इसके साथ ही खेती योग्य उपजाऊ भूमि और जंगलों को भी भारी नुकसान होगा।परियोजना के लिए राज्य में भूमि अधिग्रहण करने की जरुरत पड़ेगी जिससे करीब 20 हजार लोगों पर इसका असर पड़ेगा और उन पर विस्थापित होने का खतरा गहराएगा। 

स्थानीय लोगों ने 2017 में निरीक्षण पैनल को चिट्‌ठी लिखी थी

सूचना  के अनुसार  प्रदेश की प्रस्तावित राजधानी के आसपास रहने वाले लोगों ने विश्व बैंक की निरीक्षण टीम को 25 मई 2017 को एक पत्र लिखा था। पत्र में प्रोजेक्ट के निर्माण से लोगों को होने वाली समस्याएं जिनमे आजीविका पर खतरा, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और पुनर्वास जैसी परेशानियों का जिक्र किया था। उन्होंने साथ ही इस कार्य में पर्यावरण और सामाजिक मानदंडों का पालन नहीं होने की बात भी कही थी।