33 इंच के कदमों ने मापा तिब्बत का मानचित्र


नई दिल्ली : क्या आप जानते है कि तिब्बत का मानचित्र किसने तैयार किया था और किसने तिब्बत की सीमा मापी थी आज हम आपको बताने जा रहे है 2 भारतीय सर्वेक्षकों ( Surveyor )  के बारे में जिसे जानकर आप भी हैरान रह जायेगे जी हाँ , डेढ़ सौ साल पहले जब तिब्बत में किसी बाहरी आदमी को देखते ही मार दिया जाता था वही दुर्गम रास्तों और बर्फीले मौसम में जान का जोखिम उठाकर विशेष रूप से प्रशिक्षित 2 भारतीय सर्वेक्षकों ने 33 इंच के कदमों से पहली बार तिब्बत का मानचित्र तैयार किया था।

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यह बात मध्य 19वीं सदी की है। लगभग पूरे इंडिया पर अंग्रेजों का शासन स्थापित हो चुका था, लेकिन रूसी हमले का खतरा उनकी नींद उड़ाये रखता था। आक्रमणकारियों के इंडिया में घुसने के 2 मार्गों की पहचान की गई । इनमें से एक पूर्वोत्तर का इलाका भी था जहाँ तिब्बत के रास्ते घुसा जा सकता था। अंग्रेजों के लिए परेशानी यह थी कि उनके पास चीन या तिब्बत के इलाकों की कोई जानकारी नहीं थी।

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ऐसे में उन्होंने इस काम के लिए कई युवकों को स्पेशल रूप से ट्रेनिंग देना शुरू किया। उन्हें इस प्रकार चलने का ट्रेनिंग दी गई थी कि उनके हर कदम 33 इंच के हों। चाहे वह समतल जमीन पर चल रहे हों। चढ़ाई चढ़ रहे हों या ढलान पर उतर रहे हों।

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भारतीय सर्वेक्षण विभाग के 250 वर्ष पूरा होने के मौके पर स्मारक डाक टिकट जारी करने के लिए यहां आयोजित कार्यक्रम में इसी पर आधारित एक फिल्म दिखाई गई । अंतत: वर्तमान उत्तराखंड के मुंसियारी के नजदीक के 2 युवकों नयन सिंह और हरि सिंह को इस काम के लिए चुना गया। दोनों संन्यासी के वेश में काठमांडू होते हुये लासा के लिए निकले।

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नयन सिंह को कोड नाम मुख्य पंडित और हरि सिंह का छोटा पंडित दिया गया। इनके आँकड़े एकत्र करने का तरीका बड़ा अनूठा था। इनके फेरने की माला में (108 की जगह) सौ मनके थे और 100 कदम पर ये एक मनका गिरा देते थे। इस प्रकार एक माला समाप्त होने पर 10 हजार कदम या लगभग पाँच मील की दूरी तय हो जाती थी।

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ये अपने साथ छुपा कर कम्पास और सेक्सटेंट ले गये थे जो दिशा तय करने में मदद करते थे। साथ ही इनके सामान रखने के बक्से में एक खुफिया खाना बना हुआ था जिसमें ये अपने नोट्स और मानचित्र रखते थे। किसी जगह की ऊँचाई तय करने के लिए वे वहाँ पानी को उबालते थे और थर्मामीटर से उसका तापमान माप कर हवा के दबाव के हिसाब से ऊँचाई तय करते थे।