हिमाचल के लाहौल स्पीति में ‘550 साल पुरानी ममी’ आज भी ध्यान मग्न मुद्रा में है


आपने हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति के बारे में सुना होगा। ये इलाका भारत तिब्बत सीमा के काफी नज़दीक है। हाल ही में इस जगह के एक छोटे से गांव से एक चौकाने वाली घटना सामने आयी है। दरअसल लाहौल स्पीति के गांव गियु से एक 550 साल पुरानी ममी मिली और इस वजह से ये क्षेत्र आजकल चर्चा में है।

सबसे ख़ास बात है की ये ममी ध्यान मुद्रा में है और किसी संत की है। आपको बता दें की तथ्यों के आधार पर वैज्ञानिकों ने इसे ममी मानने से इंकार कर दिया है। इस ममी को वर्ष 1993 में ITBP के जवानों को सड़क बनाते समय खोज निकाला था। गाँव वाले बताते है की सड़क निर्माण के वक्त खुदाई में ये ममी मिली और इसके सर पर कुदाल लगने से खून भी निकला था।

ऐसा पहली बार हुआ है की किसी ममी या वर्षों पुरानी लाश से खून निकला हो। साल 2009 तक इसे ITBP के कैंप में सुरक्षित रखा गया था बाद में इस ग्रामीणों ने अपनी अमानत बताकर अपने साथ ले गए और इस ममी का छोटा सा मंदिर भी बनवा दिया गया है जहाँ पर गाँव के लोग बारी बारी से देखभाल करते है।

बताया जा रहा है की ये ममी 545 सालों पुरानी है लेकिन हैरानी की बात है बिना किसी लेप के ये ममी इतने सालों तक कैसे सुरक्षित है। गाँव वाले इसे एक चमत्कार मानते है और ये भी कहा जा रहा है की ये ममी एक बौद्ध भिक्षु की है।

इस ममी के पीछे लोगों की एक किवदंती है की गियु गाँव में एक समय बिच्छुओं का भयंकर प्रकोप हो गया था। इस प्रकोप से बचने के लिए गाँव के लोग इस संत के पास पहुंचे सांगला तेनजिंग के पास पहुंचे जो की एक बौद्ध भिक्षु थे।

गाँव को इस प्रकोप से बचाने के लिए ये संत ध्यान समाधि में बैठ गए और गाँव से बिच्छुओं कान प्रकोप खत्म कर दिया। इन संत के बारे में जिक्र किया गया है की ये मूल रूप से तिब्बत के थे पर इस गाँव में आने के बाद ये वापस नहीं गए।