अटूट समृधि देने वाले दुर्लभ एक मुखी रुद्राक्ष के बारे में ये हकीकत कर देगी हैरान !


हिन्दू धर्म में रुद्राक्ष के अपना ख़ास महत्व है इसे काफी पवित्र माना जाता है और ये भी कहा जाता है की इसे धारण करने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा दृष्टि हमेशा बानी रहती है। रुद्राक्ष के बारे में तो अधिकतर लोग जानते है की ये एक फल का बीज होता है जो पेड़ पर लगता है पर इसकी उत्पत्ति के पीछे एक अनोखी कहानी है जो पौराणिक है।

आईये जानते है इस रोचक कथा के बारे में। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव शंकर मानव जाति के कष्ट का आभास करने के लिए ध्यान मग्न हुए। जब भगवान शिव का ध्यान टूटा तो मानवों के कष्ट से उनके आंखों से अश्रु की बूंदे गिरी, जो एक फल के बीज के रूप में जन्मी।

इसी कारण इसका नाम ‘रुद्राक्ष’ पड़ा। जिसमें ‘रुद्र’ का मतलब सदाशिव भगवान शंकर और ‘अक्ष’ का मतलब अश्रु अर्थात आंसु।आरंभ में रुद्राक्ष का फल हरा होता है। लेकिन आगे जाकर वह गहरे नीले रंग में परिणत हो जाता है और फिर उसके सुखने पर रुद्राक्ष के दाने प्राप्त होते हैं।

असंख्य रुद्राक्षों में से एकाध हीं एक मुखी रुद्राक्ष प्राप्त होता है।आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि रुद्राक्ष में अपार शक्ति होती है, जो मानव जाति के कल्याण के निमित्त निहित होती है।

बीजों की विभिन्नता के कारण रुद्राक्ष अनेक मुखी रूप में होता है इसमें एक मुखी रुद्राक्ष को काफी दुर्लभ माना जाता है।कभी-कभी यह इतना दुर्लभ होता है कि इसमें भगवान शंकर की मुखाकृति सहित नाग आकृति भी दिखाई देती है।

इस तरह के एक मुखी रुद्राक्ष को अत्यधिक शुभ और कष्टहारी माना जाता है। विद्वानों के अनुसार ऐसे एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने या पूजन करने वाला व्यक्ति हर तरह से सुखी संपन्न, समृद्ध और भगवान शिव का कृपापात्र बना रहता है। उसका सौभाग्य उदय होता है और हर तरह की शारीरिक रोग व्याधि दूर रहती है।