दूसरे के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सबसे बड़ा धर्म


यह तो जीवन का सच है कि एक न एक दिन मृत्यु से जीवन का अंत हो जाता है? ”मेरा मेरा करके लोग रोते-पीटते हैं लेकिन यह जीव आत्मा मरने वाला पदार्थ नहीं है”, इसलिए मृत्यु पर क्या रोना मृत्यु तो मात्र नये जीवन का द्वार है लेकिन इसमें हम प्रवेश एक सूरत में कर सकते हैं, जब हम इस पृथ्वी पर कुछ अच्छा करने का प्रयास करें। अगर हम किसी भी स्थित में किसी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं या फिर उसकी मदद के लिए काम आते है तो यही बहुत होता है पृथ्वी पर फरिश्ता बनने के लिए।

यादि हम कुछ अच्छा काम करने और किसी की मदद करेगें तो ईश्वर भी इसमें हमारी मदद करेगा। जब व्यक्ति दूसरों के दर्द को अपना समझने लगता है तो वह किसी के आंसू पोंछने का प्रयास करता है तो वही शख्स पृथ्वी पर फरिश्ता हो जाता है वहीं जीवन का सबसे बड़ा धर्म होता है एंव धर्म केवल यह नहीं की आप पूजा-पाठ करें, तीर्थ यात्राएं करें या अन्य परंपरागत रीति-रिवाजों में अपने आपको व्यस्त रखें। धर्म आपको यह सिखाता है

कि आप इंसान होने के नाते दूसरे इंसानों की हर संभव मदद करे इस संसार को एक ऐसा समाज बनाएं जो बिना किसी भेदभाव के तमाम इंसानों के लिए रहने की बेहतर जगह बन जाए। जब आप ऐसा करते हैं तो मृत्यु भी आपको नहीं मार सकती, क्योंकि तब आप पृथ्वी पर ऐसा फरिश्ता बन जाते हैं, जो भौतिक मृत्यु के बाद अगला जीवन अनुभव करने के लिए तैयार हो जाते हैं।