अटलजी से मिलकर भावुक हुए बचपन के दोस्त: शैवाल सत्यार्थी


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मित्र शैवाल सत्यार्थी के सामने किसी ने बोला तो वाजपेयी जी के बचपन के मित्र सत्यार्थी जी बहुत भावुक हो गए। और उन्होंने कहा कि वह मेरे लिए कृष्ण और मैं में उनका प्रिय मित्र सुदामा हूं। शैवाल करीब-करीब उनसे 6 महीने पहले उनसे मिलने गए थे। उनका स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण शैवाल जी दुख होने केसाथ-साथ वह अपने मुंह से कोई शब्द बयां नहीं कर पाएं।

अटलजी की मेमोरी जाने पर भी वह शैैवाल जी को पहचान गए जिससे की वह बहुत खुश थे। उन्होंने कहा कि अटलजी ने सिखाए दोस्ती के सही रास्ते। अटलजी के वैसे तो बहुत मित्र थे लेकिन जब बचपन की दोस्ती की बात आती है तो सबसे पहले नाम आता है रामबाग कॉलोनी में रहने वाले मनराखन मिश्र और शैवाल सत्यार्थी जी का क्योंकि यह तीनों बचपन में पक्के मित्र हुआ करते थे। मनराखन जी अब दुनिया में नहीं रहे हैं।

शैवाल जी आज तक भी अपने मित्र मनराखन की यादों को सहेजे हुए हैं। अटलजी शैवाल से थोड़े बड़े थे लेकिन वह दोना एक दूसरे के पड़ोसी थे। इन दोनों मित्रों ने उन्हीं संस्थाओं से पढ़ाई की जहां अटलजी पढ़े थे। अटलजी ने ही शैवाल को असली दोस्ती का मतलब समझया। अटलजी ने बताया कि दोस्ती का मतलब यह नहीं कि दोस्त का हमेश साथ ही दिया जाए बाल्कि असली दोस्त का मतलब यह है कि यदि एक दोस्त गलत राह पर चलता है तो उसे सही राह दिखना हमारा कर्तव्य है।

शैवाल जी ने कहा कि मैं अटलजी ने राजनीति के शिखर पहुंच कर भी अपनों के लिए हमेशा ही आम इंसान बने रहे। जब पहली बार प्रधानमंत्री बन ग्वालियर आए तो मनराखन मिश्र जी और मुझे सबसे पहले मिलने को बुलाया और साथ में बैठ कर पकवान भी खाएं। हाल ही में शैवाल सत्यार्थी को दिल का दौरा पड़ा, लेकिन स्वस्थ हो गए। उस वक्त उनकी इच्छा हुई कि अटलजी से मिलना चाहिए।

वह दिल्ली पहुंचे और उनके मिलने के लिए आवेदन की औपचारिकता प्रक्रिया पूरी की।  शैवाल ने यह भी बताया कि जब वह अटलजी के रूम में पहुंचे और उनको बेड पर चादर ओढ़े लोटे देखा।

तो वह एक बार को तो जैसे सदमें में ही पहुंच गए हो। वह अटलजी को उस हालत में देख कर बिल्कुल चुप से हो गए। और बुलाने पर अटलजी को होश आया। झींगटाजी ने बताया के काफी लंबे समय के बाद आज अटलजी के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली है।