प्लास्टिक के इस्तेमाल से हो सकता है नुकसान


प्लास्टिक ने हर घर में अपनी इतनी जगह बना ली है कि उसे घर से बाहर करना कल्पना से बाहर है। घर में नहाने की बाल्टी-मग से लेकर दाल मसाले रखने वाले कंटेनर्स सभी प्लास्टिक के ही होते हैं जिनका अक्सर उपयोग हर घर में होता है।  छाछ,दूध, स्प्राउट्स सभी खाद्य पदार्थ इन प्लास्टिक की थैलियों में मिलते हैं जो खाने में तो सेहतमंद होते हैं पर प्लास्टिक पैकिंग की वजह से नुक्सान पहुंचा सकते हैं।  दिन में न जाने कितनी बार हम पानी पीते हैं वह भी प्लास्टिक बोतल से। और तो और, घर से बाहर जाते समय गाड़ी में पानी की प्लास्टिक बॉटल साथ ले जाते हैं जो घंटों गाड़ी की गर्मी में पड़ी रहती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है यह कैरी करने में हल्का होता है और लाने ले जाने में आसान भी। इसलिए इसे छोडऩा मुश्किल है।

रंगीन प्लास्टिक का रंग कई बार गर्मी से पिघल कर बाहर आ जाता है, विशेषकर बच्चों को खिलौनों में। यूरोप और अन्य कई देशों ने इस तरह के प्लासिटक खिलौनों पर बैन लगा दिया है। एक रिसर्च के अनुसार कुछ समय बाद बार-बार प्लास्टिक कंटेनर को गर्म करने से उसके केमिकल्स टूटने शुरू हो जाते है जो हमारे खाने पीने की चीजों के साथ मिक्स होकर गंभीर बीमारियों के जिम्मेदार बनते हैं।

प्लास्टिक प्रयोग करने में बरतें सावधानी:-
– बार -बार प्लास्टिक कंटेनर्स को गर्म खाने या पीने के लिए प्रयोग में न लाएं। प्लास्टिक का प्रयोग स्टोरेज कंटेनर्स, लंच बाक्स या वाटर बॉटल के लिए कम से कम करें।

– हर दो-तीन साल के अंतराल में प्लास्टिक कंटेनर्स बदल दें। वॉटर बाटल भी हर साल बदलें।

– कांच या स्टील कंटेनर्स का प्रयोग अधिक से अधिक करें। घर में पानी की, दूध की बॉटल कांच की ही प्रयोग करें। बाहर जाते समय थोड़े समय के लिए इनका प्रयोग करें।

– प्लास्टिक कंटेनर्स में सामान्य तापमान वाली वस्तुएं ही रखें। प्लास्टिक लंच बॉक्स का प्रयोग करना पड़े तो उसमें खाना गर्म न करें।

– खाने के तेेल को स्टील कंटेनर में रखें। अगर प्लास्टिक कंटेनर में रखा हो तो उसे गैस से दूर रखें।

– सिल्वर फॉइल में भी खाना सामान्य तापमान वाला ही पैक करें।

– थर्मोकोल के गिलास में साफ्ट ड्रिंक न डालें।

– सभी दालें, मसाले, आटा, चावल, सूखे मेवे स्टील कंटेनर्स में या कांच के कंटेनर्स में रखें। ड्राई फ्रूटस को फूड ग्रेड प्लास्टिक या प्लास्टिक जिप लॉक पाउच में भी रखा जा सकता है।

– टेट्रापैक, थर्मोकोल में गर्म खाना रखना सेहत के लिए हानिकारक है।

– नान स्टिक बर्तनों में जो टेफलॉन की कोटिंग होती है उसमें पका खाना भी हमें नुक्सान पहुंचाता है। बर्तन की कोटिंग खराब होते ही बर्तन का प्रयोग बिलकुल न करें। नॉन स्टिक बर्तनों को तेज आंच पर न रखें। उसमें कुछ खाद्य पदार्थ डालकर मध्यम आंच पर पकाएं।

– खट्टी खाने की चीजों को अल्युमीनियम के बर्तनों में न पकाएं।

– बच्चों की दूध की बॉटल भी स्टील या कांच की खरीदें। बाहर जाते समय अगर प्रयोग करना भी पड़े तो बिलकुल सामान्य तापमान वाला दूध डालें। बचा दूध निकाल कर फेंक दें।