गुजरात में स्कूली फीस पर नियंत्रण करने की मांग की


गुजरात में स्कूलों की कथित मनमानी फीस वसूली पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार की ओर से हाल में बनाये गये बहुचर्चित गुजरात स्ववित्त पोषित विद्यालय (शुल्क नियमन कानून) 2017, जिसको सही ढंग से लागू करने के लिए अभिभावकों की ओर से स्कूलों में प्रदर्शन आये दिन हो रहे हैं, को अपने बच्चों की पढाई में बाधक बताते हुए कुछ कथित धनी मानी अभिभावकों ने इसे रद्द कराने के उद्देश्य से गुजरात हाई कोर्ट में आज एक अर्जी दाखिल की है।

इस कानून में प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के लिए फीस की अधिकतम सीमाएं क्रमश: 15 हजार, 25 हजार और 27 हजार रूपये वार्षिक तय कर दी गयी है। इससे अधिक फीस लेने पर उचित कारण बताना होगा। किसी खास दुकान से ही स्कूल ड्रेस और किताबें तथा अन्य पाठ्य सामग्री खरीदने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गयी है। इसे मध्यम वर्ग के लिए बहुत ही राहतदायक माना जा रहा है।

इस बीच तीन अभिभावकों ने हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर स्कूल प्रबंधकों और अभिभावकों के बीच चल रही कानूनी लडाई में खुद को एक पक्षकार बनाने के लिए अर्जी दी है। उनके वकील शालीन मेहता ने आज बताया कि उनके मुवक्किल इस कानून को बच्चों की बेहतर पढाई में बाधक मानते हैं।

फीस कम होने से स्कूल कई तरह की गतिविधियों को कम अथवा समाप्त कर सकते हैं जिससे बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिलेगी। इसलिए वह इस कानून को ही समाप्त कराना चाहते हैं। उधर, इस कानून को अब तक सही ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाते हुए आये दिन कई स्कूलों में अभिभावक प्रदर्शन कर रहे हैं।