इन नियमों का पालन करना चाहिए पूजा करते समय


अक्सर आपने सुना होगा कि यह बोला जाता है कि पूजा अगर आपने पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं तो भगवान प्रसन्न होकर उसका फल जरूर देते हैं। जब भी आप पूजा करते हैं तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उस समय आपके मन में श्रद्धा होनी बहुत जरूरी है।

इसके साथ ही पूजा के कई ऐसे नियम होते हैं जिनका पालन करना भी बहुत जरूरी होता है। हम आपको बताते हैं कि पूजा के नियम किस प्रयाग में होते हैं और इनका कैसे पालन करना चाहिए। चलिए जानते हैं कि पूजा के नियम के बारे में इस प्रयाग होते हैं।

जब भी आप हनुमान जी की पूजा करते हैं तो इस नियम को आधे प्रहर यानी 12 से 1 बजे के बीज हनुमान जी की पूजा नहीं की जानी चाहिए।

अगर आप रात में यानी सूर्य अस्त होने के बाद पूजा कर रहे हैं तो शंख नहीं बजाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि सूर्यास्त के होने के बाद देवता सोने के लिए चले जाते हैं। ऐसा बोला जाता है कि शंख की आवाज से देवता की निद्रा बाधित होती है। ऐसा माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद शंख बजाने से लाभ की बजाय हानि ही होती है।

सूर्य भगवान की पूजा दिन में ही होती है इसलिए दिन में अगर कोई विशेष पूजा कर रहे हैं तो साथ में सूर्य की पूजा भ्ज्ञी जरूर करनी चाहिए। लेकिन रात्रि में पूजा कर रहे हों तब सूर्य की पूजा नहीं करनी चाहिए।

भगवान विष्णु, कृष्ण, सत्यनारायण की पूजा में तुलसी की आवश्यकता होती है। माना जाता है कि तुलसी के पत्ते के बिना इनकी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है।

अगर आप रात में पूजा करते हैं तो तुलसी के पत्ते को दिन में ही तोड़ कर रख लें। शाम होने के बाद तुलसी के पत्ते को नहीं तोडऩा चाहिए उस वक्त तुलसी के सोने का होता है।

गणेश जी की पूजा में दूर्वा का प्रयोग होता है। भगवान शिव, सरस्वती, लक्ष्मी और दूसरे देवताओं को भी दूर्वा चढ़ता है। इसलिए रात में पूजा करनी हो तो दिन में ही दूर्वा तोड़कर रख लेना चाहिए।

रात में पूजा करें तो पूजा में इस्तेमाल फूल, अक्षत और दूसरी चीजों को रात भर रहने दें। इन्हें सुबह अपने स्थान से हटाना चाहिए।

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