क्या आपको भी कुछ कहता है कान का दर्द


बहुत सी अलग-अलग स्थितियां हैं जिनसे कान में दर्द हो सकता है। कान का दर्द किस अंदाज का होता है, इसमें भी काफी भिन्नता होती है। अगर कान में चोट लगने की बात को छोड़ दिया जाये तो अधिकतर कान के दर्द किसी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण से होते हैं। मसलन, बहुत से मामलों में कान का दर्द उस समय होता है जब कोई बाहरी चीज कान में फंस जाती है। बच्चे कभी-कभी जान बूझकर कोई चीज अपने कान में डाल लेते हैं या किसी दूसरे बच्चे के कान में डाल देते हैं।

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इसी तरह जब कान का मैल या वैक्स सख्त हो जाता है तो उससे भी दर्द होता है। इसे व कान में फंसी किसी अन्य चीज को डाक्टर द्वारा ही निकलवाना चाहिए, क्योंकि डाक्टर ही जानता है कि कान के नाजुक हिस्सों को चोट से कैसे बचाया जाये।

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बाहरी कान में जो संक्रमण होता है, वह उस समय होता है जब हम स्वयं गंदे हेयरपिन या माचिस की तीली से वैक्स या किसी अन्य चीज को निकालने का प्रयास करते हैं या फिर खुजली को कम करने की कोशिश करते हैं। हेयरपिन आदि से त्वचा टूट जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कान में छाला पड़ जाता है, कान सूज जाता है और कान में भयंकर दर्द होने लगता है।

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फंगस से बाहरी कान व कैनाल में संक्रमण हो जाता है और कैनाल में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द होता है। कभी-कभी कोल्ड या अन्य सांस के संक्रमण के बाद भी कान में जबर्दस्त दर्द महसूस होता है। ईअरड्रम या कान का पर्दा जो बाहरी व मध्य कान के बीच में होता है, उस पर सूजन आ जाती है। मध्य कान इसलिए भी संक्रमित हो सकता है कि व्यक्ति ने सही से नाक नहीं सिनकी है।

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दोनों नथुनों को एक साथ सिनकना चाहिए, क्योंकि एक बार में एक नथूने को सिनकने से संक्रमित पदार्थ साइनस में जा सकता है। इसके अतिरिक्त भी कान में दर्द के अन्य कारण हैं, इसलिए अगर किसी के बार-बार कान में दर्द हो रहा है तो बेहतर है डाक्टर से सम्पर्क किया जाये।