क्या आप जानते है महिलाएं के बिछुए और पायल पहनने के पीछे का ‘वैज्ञानिक कारण’?


अक्सर ऐसा होता है जिस बातों को हम मान्यता या परंपरा मानते है उन बातों के पीछे कई ऐसे रहस्य छुपे होते है जिनके बारे में हमे पता नहीं होता। आज हम आपको बताएँगे की प्राचीन काल से महिलाओं के गहनों में शामिल पायल जिसे पाजेब भी कहा जाता है और बिछिया पहनने की पीछे छुपे रहस्य के बारे में। जिस तरह हिन्दू संस्कृति का प्राचीन इतिहास रहा है उसी प्रकार महिलाओ का गहनों के प्रति प्रेम भी सदियों पुराना है।

पायल और बिछिया पहनना सिर्फ आभूषण पहनने की परंपरा नहीं है बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक महत्व और कारण भी है जिस वजह से इन दोनों को पहनना एक महिला के लिए विशेष और जरुरी समझा जाता है। आजकल भले ही फैशन का दौर है और पायल और बिछिया की जगह तो रिंग और एंकलेट्स ने ले ली हो पर जो काम इन प्राचीन आभूषणों का है वो कोई और गहना नहीं कर सकता।

चाहे वह कामकाजी महिलाएं हों, गृहिणी हों सभी के लिए बिछिया एवं पायल सुन्दरता के साथ बेहद स्वास्थ्यवर्धक पाए गये हैं। बिछिया एक महिला के पैर में अंतिम आभूषण के रूप में पहनी जाती है। जैसा की आप जानते होंगे आम तौर पर दोनों पैरों की बीच की तीन उंगलियो में बिछिया पहनने का रिवाज है।

असल में महिला के सारे श्रृंगार बिछिया और टीका के बीच होते हैं। मुख्यतः धार्मिक प्रसंगों के चलते एक महिला के लिए सोने का टीका और चांदी की बिछिया का भाव ये होता है कि आत्म कारक सूर्य और मन कारण चंद्रमा दोनों की कृपा जीवनभर बनी रहे। भारत में अधिकतर विवाहित महिलाये बिछिया पहनती है और इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है , भारतीय वेदों में सर्वप्रथम बताया गया है कि इन्हें दोनों पैरों में पहनने से महिलाओं का मासिक चक्र नियमित होता है।

वहीं आयुर्वेद अनुसार बिछिया एक्यूप्रेशर का काम करती है, जिससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नाड़िया और पेशियां व्यवस्थित होती हैं। बेशक फैशन के दौर में इसका चलन काम हो गया हो पर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसका चलन जारी है और आप ये नहीं जानते होंगे की आयुर्वेद के अनुसार बिछिया और पायल एक्यूप्रेशर का काम करती है, जिससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नाड़िया और पेशियां व्यवस्थित होती हैं। बिछिया और पायल गर्भाशय को नियन्त्रित करती है और गर्भाशय में सन्तुलित ब्लड प्रेशर द्वारा उसे स्वस्थ भी रखती है । इस कारण ही पैरों में बिछिया महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने में भी बहुत अहम भूमिका निभाती है।