रामजस कॉलेज संघर्ष मामला : अदालत ने पुलिस के स्थानांतरण आवेदन खारिज किया


नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें रामजस कॉलेज में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने की घटना में एक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाली शिकायत को एक अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सतीश कुमार अरोड़ा ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के स्थानांतरण आवेदन को खारिज कर दिया, जब जांच अधिकारी दूसरी बार अदालत में उपस्थित होने में विफल रहे। मामला आगे की सुनवाई के लिये मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा के समक्ष 19 जुलाई को आएगा। पुलिस ने स्थानांतरण आवेदन यह कहते हुए दायर किया कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने की शक्ति मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के पास है और मजिस्ट्रेट के पास मामले में मुकदमा चलाने का क्षेत्राधिकार नहीं है।

यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि अधिवक्ता विवेक गर्ग द्वारा शिकायत दायर करने के बाद सीएमएम ने इसे मजिस्ट्रेट मल्होत्रा की अदालत के लिये चिन्हित कर दिया था। शिकायतकर्ता गर्ग ने पुलिस की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि पुलिस मामले में विलंब कर रही है और कार्वाई रिपोर्ट दाखिल करने से हिचक रही है क्योंकि वह घटनाओं की जांच करने को इच्छुक नहीं है। मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई के दौरान पुलिस ने इससे पहले कहा था कि दिल्ली पुलिस आयुक्तने एक जांच समिति का गठन किया है, जो इस साल 2122 फरवरी को हुई घटनाओं के संबंध में शिकायतों की जांच कर रही है और अब तक 62 गवाहों का परीक्षण किया जा चुका है। इसमें छात्र समूह और पुलिस अधिकारी शामिल हैं। गर्ग ने शिकायत दायर करके उन घटनाओं के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी जिसमें कथित तौर पर आइसा और एसएफआई के सदस्यों ने रामजस कॉलेज में राष्ट्र विरोधी नारे लगाए थे।